पाक ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की नजरबंदी 30 दिनों के लिए बढ़ाई

लाहौर|…. मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की नजरबंदी एक बार फिर 30 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है. पाकिस्तान के पंजाब प्रोविंस के ज्यूडिशियल रिव्यू बोर्ड ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया. हालांकि बोर्ड ने सईद के 4 साथियों की नजरबंदी बढ़ाने से इनकार कर दिया. प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के सरगना सईद पर ये नजरबंदी 24 अक्टूबर से लागू होगी.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक हाफिज सईद के 4 साथियों अब्दुल्लाह उबैद, मलिक जफर इकबाल, अब्दुल रहमान आबिद और काजी कासिफ हुसैन को अगर किसी और केस में हिरासत में नहीं लिया गया तो उन्हें छोड़ा जा सकता है क्योंकि इनकी नजरबंदी की अवधि 25 सितंबर को खत्म हो गई थी. इस मामले की सुनवाई करने वाले रिव्यू बोर्ड में जस्टिस यावर अली (हेड), जस्टिस अब्दुल सामी और जस्टिस आलिया नीलम शामिल थे.

बता दें कि हाफिज सईद मुंबई के 26/11 हमले का मास्टरमाइंड है. इन हमलों में 6 अमेरिकी नागरिकों समेत 166 लोग मारे गए थे. हाफिज सईद और उसके चारो साथियों को कड़ी सुरक्षा के बीच नजरबंदी पर सुनवाई के लिए लाहौर हाईकोर्ट के प्रोविंशियल रिव्यू बोर्ड के सामने लाया गया. इस दौरान अच्छी-खासी संख्या में इनके समर्थक कोर्ट कैम्पस में मौजूद थे. इस दौरान समर्थकों ने इन पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं. हालांकि पुलिस ने समर्थकों को इनके पक्ष में नारेबाजी करने से रोक दिया. कोर्ट के एक ऑफिशियल ने बताया कि पंजाब सरकार के गृह विभाग ने पब्लिक सेफ्टी लॉ के तहत हाफिज सईद और उसके साथियों की नजरबंदी की अवधि को 3 महीने बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन ज्यूडिशियल बोर्ड ने सरकार के लॉ अफसर की अपील मानने से इनकार कर दिया और हाफिज सईद की लाहौर में सिर्फ 30 दिनों की नजरबंदी बढ़ाने का आदेश दिया.

पाकिस्तान के कानून के तहत सरकार किसी भी आरोपी शख्स को 90 दिनों तक हिरासत में रख सकती है. उसकी हिरासत अवधि बढ़ाने का फैसला सिर्फ ज्यूडिशियल रिव्यू बोर्ड ही कर सकता है. 14 अक्टूबर को पंजाब सरकार ने सबको हैरान करते हुए हाफिज सईद और उसके 4 साथियों की नजरबंदी अवधि बढ़ाने की अपनी अपील वापस ले ली थी. सरकार ने बोर्ड से कहा था कि वो एंटी टेरेरिज्म एक्ट के तहत सईद को अब और हिरासत में नहीं रखना चाहती. पंजाब सरकार ने एंटी-टेररिज्म एक्ट 1997 के तहत 31 जनवरी से लेकर 90 दिनों तक पहली बार सईद और उसके 4 साथियों को नजरबंदी में रखा था. पिछली 2 बार यह अवधि पब्लिक सेफ्टी लॉ के तहत ही बढ़ाई गई थी.