आज है नरक चतुर्दशी: पढ़ें- पूरी कथा और पूजा विधि

आज (18अक्टूबर) छोटी दिवाली यानी कि नरक चतुर्दशी है, जिसे कि यम चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. आज((18अक्टूबर) के दिन जो भी इंसान तिल का तेल लगाकर स्नान करता है वो पुण्य का भागीदार बनता है, उसे यमराज की विशेष कृपा मिलती है और उसके सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं. स्‍नान के बाद सुबह-सवेरे राधा-कृष्‍ण के मंदिर में जाकर दर्शन करने से पापों का नाश होता है और रूप-सौन्‍दर्य की प्राप्ति होती है यही नहीं माना जाता है कि आज के दिन बजरंग-बली का जन्मदिन हुआ था इसलिए आज के दिन संकट-मोचन की खास पूजा की जाती है. आज के दिन लोग शाम को यमराज के नाम का दीपक भी जलाते हैं.

ये है कथा

प्रचलित कथा के अनुसार एक राजा को जब यमदूत नरक के लिए लेने आया तो, राजा ने नरक में जाने का कारण पूछा. यमदूत ने बताया कि उसने एक ब्राह्मण को द्वार से भूखा लौटा दिया था. राजा यमदूत से एक वर्ष का समय मांगता और यमदूत उसे समय दे देते हैं. इसके बाद राजा ऋषियों के पास पहुंचता है और पूरा वृतांत बताता है. ऋषियों के कहने पर राजा कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को व्रत करता है और ब्राह्मणों को भोज कराता है. इसके बाद राजा को नरक के बजाय विष्णुलोक में स्थान मिलता है. तब से ही इस दिन यमराज की विशेष पूजा की जाती है.

स्नान और दीपदान का मुहूर्त

अभ्यंग स्नान का मुहूर्त सूर्योदय से पूर्व और चंद्रमा के उदय रहते हुए सुबह 04.47 से सुबह 06.27 तक रहा. इसकी अवधि एक घंटे 40 मिनट थी. यम दीपदान का पूजन मुहूर्त शाम 6 से शाम 7 बजे तक रहेगा. यम दीपदान के लिए चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखना चाहिए.

नरक चतुर्दशी के दिन पूजा करने की विधि

  • नरक से बचने के लिए इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर में तेल की मालिश करके स्नान किया जाता है.
  • स्नान के दौरान अपामार्ग की टहनियों को सात बार सिर पर घुमाना चाहिए.
  • टहनी को सिर पर रखकर सिर पर थोड़ी सी साफ मिट्टी रखें लें.
  • अब सिर पर पानी डालकर स्नान करें.
  • इसके बाद पानी में तिल डालकर यमराज को तर्पण दिया जाता है.
  • तर्पण के बाद मंदिर, घर के अंदरूनी हिस्सों और बगीचे में दीप जलाने चाहिए.