जानें क्या सीख देती हैं आपके आराध्य लक्ष्मी-गणेश की यह तस्वीरें

सामान्यत: लोगों को बचपन से एक ही चीज सिखाई जाती है, मंदिर जाओगे, जोत जलाकर धूपबत्ती करोगे और फिर भगवान से जो मांगोगे, वो दे देंगे. पर शायद उसे यह नहीं मालूम कि हमारे सभी शास्त्रों में और विशेष रूप से भागवत गीता में भी यही कहा गया है कि कर्मशील बने, सत्कर्म से भाग्य को भी बदला जा सकता है.

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हमारे भगवानों के जितने भी चित्र हैं, वे हमे शिक्षा देने के लिए ही हैं कि हम लोगों को अपना स्वरूप कैसा बनाना चाहिए. हमें दिन-रात क्या आचरण करना चाहिए, ताकि समृद्धि आ सके न कि काम धंधा छोड़कर दिन-रात देवताओं के मंत्रों के साथ लगे रहना चाहिए.

लक्ष्मी जी के स्वरूप में लक्ष्मी जी के बाईं ओर सरस्वती जी विराजमान रहती हैं और दाईं ओर गणेश जी विराजमान रहते हैं और उनके पीछे दो सफेद हाथी होते हैं, जो कलश से गंगा बहा रहे हैं. लक्ष्मीजी के इस चित्र में ज्ञान अथवा हुनर की प्रतीक सरस्वती जी को दिखाने का अर्थ है कि व्यक्ति को जीवन में अच्छा ज्ञान अर्जित करना चाहिए, ताकि उसके बल पर वे हुनरमंद बन सकें और अपना जीवनयापन अच्छे तरीके से कर पाएं.

सभी जानते हैं कि गणेशजी का स्वरूप और आचरण बताया गया है कि एक जगह बैठो अर्थात जमकर डटे रहो. यह हमें सिखाता है कि मां सरस्वती से काम-धंधे की शिक्षा लेकर अपने हुनर में प्रवीण होकर यदि व्यक्ति गणेशजी की तरह जमकर काम करेगा तो लक्ष्मीजी यानी धन की प्राप्ति अवश्य होगी. इस चित्र में पीछे बने दो सफेद हाथी राहु का प्रतीक है, राहु अर्थात हमारे ज्ञान के कारण हमारे कार्य अथवा व्यापार को बढ़ाने के लिए हमारे दिमाग में आने वाले अचानक विचार जो जैसे ही हमारी बुद्धि में आएं, उनके अपने व्यवसाय पर लागू कर दें अर्थात कलश से ज्ञान की गंगा बहा दें, जिस प्रकार वो हाथी सदा गंगा बहाते रहते हैं.

जैसे ही यह ज्ञान की गंगा बहाएंगे, दुनिया में अपने काम-धंधे में ये सकारात्मक लाभकारी विचार लागू करेंगे तो फिर साक्षात् लक्ष्मी जी सिक्के बरसाती हुई विराजमान हो जाएंगी यानी कि लक्ष्मीजी अर्थात पैसा आना शुरू हो जाएगा। इस तरह से संसार में मनुष्य अच्छे ज्ञान के द्वारा अच्छे कर्म करके स्थाई धन खूब कमा सकता है न कि तीन-चार घंटे मंत्र जप करके. चार-चार घंटे लक्ष्मी यंत्र स्थापित करने से व दिन-रात धूपबत्ती करने से या आंख बंद करके उपाय करने से व्यक्ति तरक्की के मार्ग पर नहीं पहुंचता है.

मां लक्ष्मी के पति विष्णुजी को माना गया है. विष्णु जी का स्वरूप देखें कि वो स्वस्थ्य, आकर्षक, चमकते हुए खड़े हैं. गले में सोना सुशोभित हो रहा है व वेशभूषा राजसी है. तिरुपति बालाजी को देखिए स्वर्ण शरीर पर सुशोभित हो रहा है व रंग उनका सांवला दिखाया गया है. इसका कारण भी है कि जो पुरुष अपने घर से कमाई करने के लिए निकलेगा, धूप से उसका वास्ता पड़ेगा, मेहनत करेगा और धूल-मिट्टी फांककर आएगा तो उसका रंग भला गोरा कहां रहेगा, सांवला ही हो जाएगा.

आम मानस के लिए इसका संदेश है कि व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में लगकर ईमानदारी से खूब मेहनत करे और मेहनत से यदि इसके शरीर की सुंदरता न रहे व रंग भी सांवला हो जाए, परंतु इतना धन जरूर अर्जित होना चाहिए ताकि वह अपनी गृहस्थी का सुचारू रूप से संचालन कर पाए. उसके तन पर अच्छे वस्त्र व गहने आ जाएं, इसी को समद्ध विष्णुजी का स्वरूप कहा गया है.

तिरुपति बालाजी की तस्वीर के अंदर महालक्ष्मी का वास उनके सीने में दिखाया गया है. इसका अर्थ है कि इनसान अपने घर को समद्ध बनाने के लिए अपने मन में संकल्प लेकर चलेगा और अपने ज्ञान से सत्कर्म करता हुआ मेहनत से धन कमाकर लेकर आएगा.

विष्णुजी के साधारण रूप मे चार हाथ चित्र में दिखाए जाते हैं, लेकिन विराट स्वरूप में हजारों हाथ दिखाए गए है. बिल गेट्स के शब्दों में कि जब तक मेरे लिए लाखों हाथ काम नहीं करेंगे, मैं बहुत समद्धशाली नहीं बन सकता, यह शब्द स्पष्ट रूप मे विराट विष्णु स्वरूप को परिभाषित करते हैं. और हमें सिखाते हैं कि समृद्ध विष्णु कैसे बनना है. लक्ष्मी आपके घर पर बैठी हैं, आपकी पत्नी के रूप में, वे जितनी भी समद्ध होगी अर्थात जितने अच्छे वस्त्र व गहने पहनेंगी, आप उतने ही समद्ध विष्णु कहलाएंगे.

आचार्य डॉ. ज्योति वर्धन साहनी।