आदि शंकराचार्य की समाधि पर बीजेपी का पूर्व CM हरीश रावत को करारा जवाब

केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की समाधि की जीर्णोद्धार परियोजना का 20 अक्टूबर को प्रस्तावित शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कराए जाने पर कांग्रेस द्वारा उठायी जा रही आपत्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उत्तराखंड बीजेपी ने मंगलवार को कहा कि निर्माण कार्य सरकार द्वारा कराए जाते हैं और उसके प्रतिनिधि ही शिलान्यास करते हैं.

अस्थायी राजधानी देहरादून में संवाददाताओं द्वारा इस संबंध में पूछे जाने पर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा, ‘निर्माण कार्य सरकार के होते हैं और सरकार के प्रतिनिधि से ही उनका शिलान्यास कराया जाता है.’ वर्ष 2013 में आयी प्राकृतिक आपदा के दौरान आदिगुरू की समाधि बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी.

आदिगुरू की क्षतिग्रस्त समाधि के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास चारों पीठों के शंकराचार्यों से कराए जाने के कांग्रेस के सुझाव के बारे में भट्ट ने कहा कि इस बाबत कांग्रेस से कोई प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है कि शिलान्यास किससे कराया जाए.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को कहा था कि आठवीं सदी के ऋषि द्वारा स्थापित किए गए चारों पीठों के शंकराचार्यों द्वारा यह कार्य किया जाना चाहिए था.

समाधि की जीर्णोद्धार परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री से कराए जाने पर हरीश रावत ने आपत्ति प्रकट की थी. इस बीच, द्वारिका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को एक पत्र लिखकर कहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा परियोजना का शिलान्यास स्वागत योग्य है, लेकिन समाधि के जीर्णोद्धार कार्य पर आदिगुरू द्वारा स्थापित किए गए चारों पीठों के शंकराचार्यों का पहला अधिकार है.

समिति को लिखे पत्र में शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा, ‘परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री द्वारा रखे जाने में कुछ भी गलत नहीं है बल्कि यह स्वागत योग्य है लेकिन जीर्णोद्धार का कार्य करना हमारा (शंकराचार्यों का) पहला अधिकार है.’

पत्र में उन्होंने लिखा है, ‘मंदिर समिति ने इस साल मई में बद्रीनाथ भ्रमण के दौरान मुझसे आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि का पुनरूद्वार करने का आग्रह किया था. मैंने जयपुर में आदिगुरू की प्रतिमा बनवा कर उसे केदारनाथ भेजा था. यह विनोद कुमार शुक्ला के आंगन में रखी हुई है.’