उत्तराखंड में एक और सरकारी नौकरी के लिए हुआ फर्जीवाड़ा

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग के बाद अब वन विभाग में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां होने की बात सामने आई है. एक गोपनीय पत्र से इसकी पोल खुलने के बाद वन विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है.

आनन-फानन में जांच के आदेश दिए गए हैं. इसके बाद देहरादून वन प्रभाग के 43 वन कर्मचारी जांच की रडार पर आ गए हैं. इनमें से कई कर्मचारियों के शैक्षिक दस्तावेज फर्जी होने की आशंका है. सभी कर्मचारियों के शैक्षिक दस्तावेजों को संबंधित बोर्ड को भेजा गया है. वहां से सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी.

फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने के मामले और शिकायतें सामने आने के बाद वन विभाग ने मृतक आश्रित कोटे से हो रही भर्ती में भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है. वन संरक्षक शिवालिक मीनाक्षी जोशी के अनुसार अब मृतक आश्रितों के प्रमाण-पत्रों की पहले संबंधित बोर्ड से प्रमाणिकता की पुष्टि व अन्य जांच होने के बाद ही नियुक्ति दी जा रही है.

एक शिकायती पत्र आया था. इसमें कुछ वन कर्मचारियों के संदिग्ध प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी पाने की बात कही गई थी. इसके बाद 2008 के बाद जो भी दैनिक श्रमिक वन आरक्षी पद पर तैनात हुआ है, उन सभी के शैक्षिक प्रमाण-पत्र आदि की जांच कराने का फैसला किया गया है. प्रमाण-पत्रों को संबंधित बोर्ड को भेज भी दिया गया है. पूर्व में भी वन विभाग में एक प्रकरण आया था, जिसमें सख्त कार्रवाई की गई थी.
– प्रसन्न पात्रो, प्रभागीय वनाधिकारी, देहरादून वन प्रभाग

इससे पहले प्रदेश में शिक्षकों के फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आ चुका है. इस मामले में अब तक 34 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं, कुछ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. जांच के गठित एसआईटी को 146 शिक्षकों की शिकायतें मिली हैं.