भारत के पहले ओलिंपिक तैराक शमशेर खान का निधन

रविवार को भारत के पहले ओलिंपिक तैराक शमशेर खान का आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 87 वर्ष के थे और अपनी तीन बेटियों व दो बेटों के साथ रह रहे थे. 1956 मेलबर्न ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खान ने गुलमुर में रेपल्ले के पास स्थित एक छोटे से गांव इस्लामपुर के अपने घर में अंतिम सांस ली. शमशेर खान भारत की ओर से सबसे पहले 1956 में ओलिंपिक में खेलने गए थे.

ब्रेस्टस्ट्रोक और बटरफ्लाई स्विमिंग में आज तक उनका रिकॉर्ड कोई भारतीय तैराक नहीं तोड़ पाया है. 1956 के ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले शमशेर पहले तैराक थे. उन्होंने 200 मीटर बटरफ्लाई कैटेगरी में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर मेलबर्न ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया था. गोल्ड मेडल जीतने के प्रति तैराक शमशेर खान बेहद आश्वस्त थे, लेकिन वे इस मुकाबले में चौथे स्थान पर रहे थे. शमशेर खान साल 1946 में सेना में भर्ती हुए थे और साल 1962 में चीन के खिलाफ और साल 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ हुए युद्ध का भी वो हिस्सा रहे.

खान का कहना था कि गांव में रहते हुए उन्होंने भैंसों के साथ तालाब में तैरना शुरू किया था और सेना में भर्ती होने के बाद उन्हें ट्रेनिंग मिली.खान अपनी मृत्यु तक एक उपेक्षित बने रहे. वह अपने आखिरी दिनों में गरीबी से लड़ते रहे और अपने इलाज के खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें पेंशन पर भरोसा करना पड़ा. खान ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मुझे सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं है. लेकिन देश के लिए इतना करने के बाद, कोई भी मुझे पहचान भी नहीं पा रहा है. हैरानी की बात यह है कि मेरे पास अभी तक राशन कार्ड नहीं है. जबकि कृष्णा जिले के उनके साथ अलंपियंस साथी और पहलवान कमिनेनी ईश्वर राव को सरकार ने अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया था.’