हाफिज पर मेहरबान पाक, वापस ली आतंक रोधी कानून के तहत नजरबंदी की अर्जी

इस्लामाबाद|…. अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की तरफ से आतंकवाद को लेकर बढ़ रहे दबाव के बावजूद पाकिस्तान के हुक्मरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं. खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकी हाफिज सईद को लेकर उसका दोमुहांपन एक बार फिर सामने आ गया है. दुनिया को दिखाने के लिए तो पाकिस्तान ने हाफिज सईद की राजनीतिक पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए मान्यता देने से इनकार कर दिया लेकिन जब मुंबई हमले के मामले में इसके खिलाफ सबूत देने की बात सामने आई तो वहां के हुक्मरानों ने कुछ नहीं किया. उल्टा वहां की सरकार भारत पर यह आरोप लगा रही है कि वह मुंबई हमले से जुड़े तमाम सबूत नहीं दे रही है. बहरहाल, हालात यह है कि हाफिज सईद के खिलाफ मामला बहुत ही कमजोर हो चुका है और उसके जेल से रिहा होने के पूरे आसार हैं.

इस पूरे मामले में पाकिस्तान सरकार व वहां की जांच एजेंसियां कितना झूठ बोल रही हैं इसका पता इस बात से चलता है कि कोर्ट में सईद के खिलाफ चल रहे मामले में यह कहा गया है कि भारत पर्याप्त सबूत नहीं दे रहा है. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की है कि अगर सबूत नहीं दिए गए तो सईद को जेल से रिहा किया जा सकता है. जबकि भारत का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से हाल फिलहाल मुंबई हमले को लेकर कोई सबूत नहीं मांगा गया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के मुताबिक, ”पूर्व में मुंबई हमले को लेकर जो भी सबूत पाकिस्तान ने मांगे थे उसे वे सारे उपलब्ध करा दिए गए हैं.” भारत पहले भी यह कई बार कह चुका है कि मुंबई हमले को लेकर जो सबूत अभी तक पाकिस्तान को दिए गए हैं उसके आधार पर दुनिया के किसी भी कोर्ट में हाफिज सईद को सजा सुनाई जा सकती है.

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान सईद पर काबू करने का सिर्फ दिखावा करता है. अंदरखाने में वहां की सेना और जांच एजेंसी आइएसआइ उससे मिली हुई है. अभी वहां के चुनाव आयोग ने उसकी पार्टी को मान्यता देने से मना किया है लेकिन इसके पीछे बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय दबाव है. खास तौर पर जिस तरह से ट्रंप प्रशासन ने लगातार पाकिस्तान को उसकी आतंकी भूमिका को लेकर चेतावनी देने का सिलसिला शुरु किया है उससे वहां के हुक्मरान बेहद घबड़ाये हुए हैं. यही वजह है कि वे सईद की पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति दे कर अंतरराष्ट्रीय जगत में अपनी और किरकिरी नहीं करवाना चाहते. लेकिन साथ ही वे उसे मुंबई हमले में दोषी भी करार नहीं देना चाहते. यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान मुंबई हमले के दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है.

पाकिस्तान के विदेश सचिव तक इस बारे में झूठ बोलते हुए पकड़े जा चुके हैं. जुलाई, 2016 में पाकिस्तान ने लाहौर कोर्ट में कहा था कि उसने नए सबूतों के लिए भारत को पत्र लिखा है लेकिन उसे कोई जबाव नहीं मिला है. इस पर भारत ने तब यह साफ किया था कि पिछले दस महीनों में पाकिस्तान की तरफ से कोई आग्रह नहीं मिला है. सूत्रों के मुताबिक मुंबई हमले को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दिसंबर, 2015 में इस्लामाबाद में विदेश मंत्रियों के स्तर पर हुई बातचीत में विमर्श हुआ था. तब भारत ने पाकिस्तान को मंुबई हमले की जांच को लेकर एक डोसियर भी सौंपा था. माना जाता है कि भारत ने हमले की साजिश में शामिल जिन 24 लोगों के नाम पाकिस्तान को सौंपे थे उन सभी को अभी तक वहां की अदालत में पेश नहीं किया जा सका है.