गौरी लंकेश की हत्या में शामिल संदिग्ध की पहचान, स्केच जारी

बेंगलुरु, वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रही पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने तीन संदिग्धों के स्केच जारी कर दिए हैं. एसआईटी का कहना है कि हमने प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर ये स्केच बनाए हैं और हमें इस मामले की तह तक जाने की इस पर लोगों के सहयोग की जरूरत है.

पुलिस एसआईटी के प्रमुख बीके सिंह ने कहा, ‘हमारे पास संदिग्धों द्वारा घटनास्थल पर की गई रेकी के फुटेज भी हैं जिसे जारी किया जा रहा है.’ बीके सिंह ने बताया दो अलग-अलग आर्टिस्ट द्वारा तैयार किए गए संदिग्धों के स्केच मेल खा रहे हैं हमने इसे प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी के आधार पर बनवाया है. गौरतलब है कि सितंबर के पहले हफ्ते में गौरी लंकेश की हत्या राज राजेश्वरी इलाके में स्थित उनके घर पर कर दी गई थी.

संदिग्धों के धर्म की पुष्टि नहीं
गौरी लंकेश साप्ताहिक मैग्जीन ‘लंकेश पत्रिके’ की संपादक थीं. इसके साथ ही वो अखबारों में कॉलम भी लिखती थीं. दक्षिणपंथी विचारधाराओं के विरोध में लिखने के लिए जानी-जाती थीं. गौरी की हत्या के बाद से ही पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है लेकिन अभी अपराधी का पता नहीं लग पाया है. एसआईटी ने अभी संदिग्धों के धर्म के बारे में भी पुष्टि नहीं की है. इस बारे में बीके सिंह का कहना है कि तिलक लगाए और बाली पहनने के आधार पर संदिग्धों के धर्म की पुष्टि नहीं की जा सकती क्योंकि ये मिसलीड करने के लिए भी किया जा सकता है.

सनातन संस्था के शामिल होने की बात सिर्फ मीडिया में
एसआईटी प्रमुख ने कहा कि इस मामले से जुड़े करीब 200 से 250 लोगों को खोजा है. एसआईटी ने यह भी साफ किया कि एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या में इस्तेमाल हुए हथियार के एक होने के सबूत नहीं है. वहीं दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था का नाम मामले में आने पर पुलिस ने कहा कि यह जानकारी केवल मीडिया में ही है हमारी तरफ से इस केस में अभी किसी संस्था के लिप्त होने की खबर नहीं है. इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने गौरी लंकेश मामले में गुरुवार को कहा था कि सभी विपक्षी और उदारवादी मूल्यों का सफाया एक खतरनाक प्रवृत्ति है और इससे देश की छवि खराब हो रही है. न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की