76 दिन में 500Km घूमकर घर लौटी बाघिन, मारने के खिलाफ याचिका दायर

महाराष्ट्र के नागपुर के बोर टाइगर रिजर्व की एक बाघिन की किस्मत पर गुरुवार को फैसला आ सकता है. यह बाघिन एक शिकारी और रेडियो कॉलर को मात देते हुए 500 किलोमीटर का सफर तय करके वापस रिजर्व में लौटी है. वह 29 जुलाई को बोर से निकली थी और 76 दिन तक घूमती रही. इस यात्रा के दौरान वह जंगल, पहाड़, घास, सड़क सब पर चली, उसने चार लेन के नेशनल हाईवे 6 को दो बार क्रॉस किया. इस सफर में उसने 2 लोगों की जान भी ले ली जिसकी वजह से अब उसकी जिंदगी खतरे में है.

बाघिन को मारने के खिलाफ याचिका दायर
पशु प्रेमियों की तरफ से बॉम्बे हाई कोर्ट में बाघिन को मारने के खिलाफ याचिका दायर की गई है. हाई कोर्ट में इसकी बहस पूरी हो चुकी है. बहस में कहा गया कि बाघिन ने इंसानों को मारा है. इसके बाद या तो उसे कैद में रखा जाए या फिर उसे गोली मार दी जाए. दरअसल इस बाघिन को 10 जुलाई को महाराष्ट्र में चंद्रुपर जिले के दक्षिणी ब्रह्मपुरी इलाके से पकड़ा गया था और उसे 29 जुलाई को हिंगानी जिले स्थित बोर टाइगर रिजर्व लाया गया, लेकिन वह वहां टिक नहीं पाई. जैसे ही उसके बोर टाइगर रिजर्व से निकलने का पता चला, फॉरेस्टर्स की एक टीम उसके पीछे लग गई. उसके शरीर पर एक रेडियो कॉलर लगा था जो शिकारी को लगातार उसका लोकेशन दे रहा था.

बाघिन ने दो व्यक्तियों की ले ली जान
इस सफर में भूख मिटाने के लिए बाघिन ने मवेशी, छोटे शिकार और दो व्यक्तियों को मारा. टीम में एक प्रशिक्षित शिकारी भी था जिसने उसको मारने का आदेश दिया था. बाघिन को 10 जुलाई को दक्षिणी ब्रह्मपुरी से पकड़ा गया था क्योंकि वहां उससे कई इंसानों की जान को खतरा था. उसे बोर के जंगलों में दूसरे बाघों के साथ 29 जुलाई को छोड़ दिया गया था. उम्मीद थी कि वह दिए जाने वाले पशु खाएगी और जंगल को ही अपना घर बना लेगी. इससे इंसान की जान को खतरा नहीं होगा. कुछ दिनों बाद यह बाघिन बिना आराम किए बोर के नवरगांव विलेज से वापस आ गई.