अफगान-पाकिस्तान बॉर्डर पर बर्लिन की दीवार की तर्ज चल रहा बाड़ लगाने का काम

पाकिस्तान|… आतंकियों को रोकने के लिए पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर बर्लिन की दीवार की तर्ज पर बाड़ लगाने की तैयारी चल रही है. इस्लामिक हमलों से चिंतित पाकिस्तान आतंकवादियों को रोकने के लिए दुरंद लाइन पर 2500 किलोमीटर लंबे बॉर्डर पर बाड़ लगाने का काम कर रहा है. दशकों से बॉर्डर के नजदीक के गांवों में रहने वाले हजारों पश्तून आदिवासियों के लिए अब तक इस बॉर्डर का कोई मतलब नहीं रहा है. वे दोनों ओर आते-जाते रहे हैं, लेकिन बाड़ लग जाने के बाद उनके लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा.

उपनिवेश-काल में ब्रिटिशों द्वारा 1893 में दुरंद लाइन बनाई गई थी जिसके दोनों ओर पश्तून आदिवासी रहते हैं. हालांकि अफगानिस्तान बाड़ लगाए जाने के खिलाफ है. दरअसल, इस बाड़ से वे गांव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे जो सीमा के दोनों तरफ बंटे हुए हैं. यहां कुछ ही लोगों के पास पासपोर्ट है. चमन जिले के आसपास ऐसे सात गांव हैं.बलूचिस्तान में पाकिस्तानी अधिकारी अब उन पाकिस्तानी नागरिकों को अपनी तरफ शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं जो विभाजित गांवों में रहते हैं.

उनका कहना है कि देश की सुरक्षा के आगे यह बात मायने नहीं रखती कि इससे समुदाय बंट जाएंगे. चमन में पाकिस्तान की फ्रंटियर कॉर्प्स पैरामिलिटरी फोर्स के कमांडर कर्नल मोहम्मद उस्मान ने कहा, ‘जर्मनी में सीमा पर दीवार थी, मैक्सिको में है. जब पूरी दुनिया में है तो फिर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच क्यों नहीं हो सकती.

इन आदिवासियों को यह समझना होगा कि यह जगह पाकिस्तान है और उस तरफ अफगानिस्तान.’हालांकि बाड़ लगाने के काम को लेकर कई तरह की आशंकाएं भी जाहिर की जा रही है. लगभग एक दशक पहले भी पाकिस्तान ऐसी कोशिश कर चुका है जो नाकाम रही थी. ऐसे में लोगों को आशंका है कि इतने लंबे बॉर्डर पर वाकई बाड़ लगाना संभव होगा या नहीं. बता दें कि हाल के दिनों में दुनिया में कई बड़े नेताओं ने इस तरह बॉर्डर पर दीवार या बाड़ लगाने की वकालत की है. खास तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप जो पूरे मैक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाना चाहते हैं. उनके अलावा हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने भी हाल ही में सर्बिया के साथ लगे बॉर्डर पर बाड़ लगवाने का काम किया है ताकि सीरियाई शरणार्थियों और अन्य मुस्लिम प्रवासियों को देश में आने से रोका जा सके.