मसूरी में ‘सचिन के आशियाने’ से निकल रही हैरान करने वाली चीजें

मसूरी के लंढौर कैंट बोर्ड में सचिन के पसंदीदा आशियाने ढहलिया बैंक पर बुलडोजर चलने के बाद कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. हकीकत तो यह है कि इन बातों पर कोई भी यकीन करने को तैयार नहीं है.

वैसे बता दें कि बैंक हाउस को तोड़ने में मजदूरों के पसीने छूट रहे हैं. अत्याधुनिक भूकंपरोधी तकनीक से बने इस भवन को दो दिन में करीब 20 प्रतिशत ही तोड़ा जा सका है. कैंट बोर्ड के मुताबिक अभी काम पूरा होने में करीब दो हफ्ते का समय और लगेगा.

सचिन के दोस्त और बिजनेस पार्टनर संजय नारंग के ढहलिया बैंक का अवैध निर्माण अत्याधुनिक भूकंप रोधी तकनीक से बना है, जिस पर नौ रिएक्टर स्केल तक के भूकंप का भी असर नहीं होगा.

शुरू में लग रहा था कि सात दिन में अवैध निर्माण टूट जाएगा, लेकिन अब तीन दिन में करीब 20 प्रतिशत ही टूटने के बाद माना जा रहा है कि काम पूरा होने में दो सप्ताह से अधिक का समय और लगेगा. नारंग के कर्मचारियों का कहना है कि जितना सामान ढहलिया बैंक से निकला है, वह सब ट्रकों में रखकर नारंग के मुंबई में बन रहे नए होटल में भेजा जा रहा है.

वहीं कैंट बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि भवन में लोहे के बीम और मजबूत सरिये लगे हैं. उनको काटने में भारी परेशानियों का सामना पड़ रहा है. संजय नारंग ने जिस टेनिस कोर्ट के नाम पर अवैध निर्माण कर गार्डन बनाया था, वो भी मलबे में तब्दील हो चुका है.

संजय नारंग के आलीशान बंगले में लहरों वाले स्वीमिंग पूल, बार रूम, ब्रिज और ताश खेलने का कमरा, जिम, भव्य किचन, सिनेमा हॉल तथा सर्दियों में रात को गर्माहट के लिए बोन फायर का चबूतरा विशेष रूप से बनाया गया था, जिसमें चारों ओर बैंच और बीच में लोहे की अंगीठी रखी थी. बताया जा रहा है कि सचिन तेंदुलकर जब नया साल मनाने यहां आते थे तो यहीं बैठकर समय बिताते थे.

ढहलिया बैंक में एक लाख लीटर का भूमिगत वाटर टैंक मिला है. इंडस्ट्रियल आरओ प्लांट भी नारंग के भवन में पाया गया. जीओसी सब एरिया कमांडर मेजर जनरल जेएस यादव ने बताया कि निरीक्षण के दौरान वहां 45 हजार के फायर टेंक, गैस पाइप लाइन, पाइन की लाइन प्लांट, दर्जनों की संख्या में बैटरी, तीन बड़े आधुनिक जरनेटर ​मिले हैं. इसे देखकर सब दंग रह गए.

ध्वस्तीकरण में लगी यश कंपनी के निदेशक विशाल ने बताया कि भवन आधुनिक तकनीक से बनाया गया है. पूरे भवन में उच्चकोटि के विदेशी कापर वायर आदि डाले गए हैं. भवन को मजबूती प्रदान करने के लिए लोहे के गार्डर लगाए गए हैं. इस पूरे ध्वस्तीकरण में अनुमान से अधिक खर्चा होने का अंदेशा है. अधिकांश सामान नारंग के कर्मचारियों ने हटा दिया है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर यहां रखे उपकरण फट जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था. क्योंकि इस कोठी के सटे सैन्य विभाग का आईटीएम भी है. यह सभी चीजें अवैध तरीके से बनी हुए हैं. करोड़ों रुपये की लागत से यहां एक सुरंग का निर्माण करवाया गया था.