भ्रष्टाचार के मामले में तेजस्वी से सीबीआई ने 7 घंटे पूछताछ की

पटना, बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव से रेलवे टेंडक घोटाला मामले में शुक्रवार को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में लंबी पूछताछ हुई. इस दौरान सीबीआई ने तेजस्वी से करीब 54 सवालों का जवाब मांगा. ज्यादातर सवालों का जवाब तेजस्वी यादव ने हां और ना में ही दिया. इस मामले में गुरुवार को राजद अध्यक्ष लालू यादव से भी सात घंटे तक लंबी पूछताछ चली थी.

सीबीआई द्वारा तेजस्वी से पूछे गए कुछ प्रमुख सवाल :

आप कोचर बंधुओं को जानते हैं? कभी मुलाकात हुई?
प्रेमचंद गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता को तो जानते होंगे?
आपकी कितनी संपत्तियां हैं? इसके स्रोत क्या हैं?
आपने कितनी संपत्ति बेची, खरीदी?
कितनी संपत्ति गिफ्ट में मिलीं?
दूसरों से गिफ्ट मिलने की वजह?
आप कितनी कंपनियों में मालिक की हैसियत में हैं?

बता दें कि गुरुवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से सीबीआई ने 7 घंटे तक पूछताछ की. लालू के साथ उनकी बेटी मीसा भी थीं जो पूछताछ के दौरान सीबीआई मुख्यालय की लॉबी में बैठी रहीं. सात घंटे की पूछताछ में लालू से अनुबंध, कंपनी के जमीन समझौते, प्रेम चंद गुप्ता से संबंध, लाभार्थी कंपनी के मालिकों से संबंध के बारे में प्रश्न पूछे गए. अब आईआरसीटीसी के दो होटलों की देखरेख का जिम्मा 2006 में निजी फर्म को सौंपे जाने और इस सौदे में हुए कथित भ्रष्टाचार के संबंध में तेजस्वी यादव शुक्रवार को सीबीआई के सामने पेश होंगे.

सीबीआई पूछताछ के बाद बाहर निकलने पर लालू ने कहा, ‘‘सीबीआई अधिकारी सौहार्दपूर्ण थे लेकिन वे क्या कर सकते हैं? वे भारत सरकार के आदेशों का पालन कर रहे हैं जो कि मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई कर रही है.

मुझे सीबीआई से कोई शिकायत नहीं है लेकिन केन्द्र सरकार मुझे और मेरे परिवार को निशाना बना रही है. ’’उन्होंने कहा , ‘‘मैंने रेलवे में चोरियां रोकीं, उसे सस्ता बनाया, राजस्व में बढ़ोतरी कराई और मुझ पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं. यह कुछ नहीं बस मुझे और मेरे परिवार को निशाना बनाया जा रहा है.’’ लालू यादव ने आगे कहा, ‘‘मैंने सीबीआई से कहा कि मैं सहयोग करूंगा. मैंने वक्त नहीं मांगा वरना मुझ पर भागने का आरोप लगने लगता.’’

आरोप है कि साल 2006 में रेल मंत्री रहते हुए लालू ने बीएनआर रांची और बीएनआर पुरी की देखरेख का जिम्मा एक निजी फर्म सुजाता होटल को सौंपा और बदले में एक बेनामी कंपनी के जरिए तीन एकड़ की महंगी जमीन के रूप में दलाली ली. सुजाता होटल का स्वामित्व विनय और विजय कोचर के पास है.