नोटबंदी के बाद फर्जी कंपनियों ने किए हजारों करोड़ के हेरफेर

नोटबंदी के बाद कालेधन को लेकर कठोर कदम उठा रही सरकार के हाथ बड़ी जानकारी लगी है. 13 बैंकों की ओर से सरकार के साथ संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी साझा की गई है. यह सभी खाते उन 2 लाख से ज्यादा कंपनियों के हैं जिनके नाम इस साल की शुरुआत में रजिस्टर ऑफ कंपनीज से हटा दिए गए थे.

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार इन 13 बैंकों ने अपने डेटा की पहली इस्टालमेंट दे दी है. इसमें उन 2 लाख कंपनियों में से 5800 कंपनियों की जानकारी है. बयान में कहा गया है कि इनमें से कुछ कंपनियों के बैंकों में 100 से ज्यादा खाते थे. इन सबमें सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एक कंपनी है जिसके कुल 2134 बैंक खाते थे. इसके बाद कुछ कंपनियों के 300 और 900 खाते भी सामने आए हैं.

दी गई जानकारी में नोटबंदी से पहले इन खातों में बैलेंस और नोटबंदी के बाद किए गए ट्रांजेक्शन और भी चौंकाने वाले हैं. लोन अमाउंट अलग करने के बाद इन कंपनियों के 8 नवंबर को क्रेडिट कार्ड में 22 करोड़ का बैलेंस था. वहीं 9 नवंबर से लेकर जब तक इन कंपनियों के नाम नहीं हटाए गए, इन सभी कंपनियों ने 4573 करोड़ से ज्यादा की रकम जमा की और निकाली. साफ है कि जन खातों में 8 नवंबर के पहले तक जीरो या माइनस बैलेंस था नोटबंदी के बाद उनमें करोड़ों रुपए डालकर कालेधन को सफेद किया गया.

गौरतलब है कि 8 नवंबर 2016 को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद काफी सारे लोगों और कंपनियों ने अपनी नकदी को खंपाने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल किया था. कुछ प्रमुख लोगों ने शेल कंपनियों के जरिए अपना कालाधन सफेद करने की कोशिश की थी, जिस वजह से कई कंपनियों के शेल कंपनी होने का खुलासा हुआ था.