2 अक्टूबर 1994: मुजफ्फरनगर (रामपुर तिराहा) कांड के 23 साल, वो जख्म अब भी हरे हैं

वैसे तो देशभर में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में याद किया जाता है. पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी इसी दिन है. लेकिन उत्तराखड में इस दिन को काला दिवस के रूप में देखा जाता है. क्योंकि इसी दिन साल 1994 को मुजफ्फनगर कांड हुआ था. इस विभत्स कांड की 23वीं बरसी पर उत्तराखंडवासी शहीद आंदोलनकारियों को याद कर रहे हैं.

उत्तराखंड में ही नहीं, दिल्ली सहित तमाम अन्य शहरों में रह रहे उत्तराखंडवासी दो अक्टूबर 1994 को उत्तराखंड आंदोलन के दौरान मुजफ्फनगर में शहीद हुए आंदोलनकारियों को याद कर रहे हैं. साथ ही शहीदों के हत्यारों को अब तक सजा नहीं मिलने से लोग दुखी भी हैं. राज्य बनने के 17 साल बाद भी न तो शहीदों के हत्यारों को सजा मिल पाई है और न ही शहीदों की जन भावनाओं के अनुरूप राज्य बन पाया है.

2 अक्टूबर 1994 को एक ओर देश महात्मा गांधी को याद कर रहा था, वहीं दूसरी ओर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे आंदोलनकारियों को गोलियों से भूना जा रहा रहा था. राज्य आंदोलनकारियों ने पहाड़ी राज्य के विकास के लिए जो लड़ाई लड़ी उसका केंद्र गैरसैंण था. आंदोलनकारी चाहते थे कि इस पहाड़ी राज्य की राजधानी गैरसैंण बने, लेकिन तमाम सरकारें अब तक जनता को महज भ्रमित करने की कोशिश ही करती रही हैं.