भारत व चीन को 1और 1 मिलकर 11 बनना चाहिए: चीनी राजनियक

भारत में चीन के राजनयिक लो झाहुई ने भारत और चीन के बीच नए संबंध की वकालत करते हुए कहा कि दोनों देशों को पुराने पृष्ठ को बंद करके रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत करनी चाहिए.

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 68वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में झाहुई ने कहा कि दोनों देशों को पुरानी बातों को भूल कर आगे बढऩा चाहिए.

एक और एक मिलकर ग्यारह बनना चाहिए
उन्होंने कहा कि इसी महीने की शुरुआत में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे. इसमें दोनों नेताओं ने मेलजोल और सहयोग बढ़ाने के साफ संकेत दिए थे.

 

चीनी राजनयिक ने कहा कि हमें पुराने पन्ने पलटकर उसी गति और दिशा के साथ नए अध्याय की शुरुआत करनी चाहिए. हमें एक और एक मिलकर ग्यारह बनना चाहिए. चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है. हमने द्विपक्षीय स्तर के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में काफी प्रगति की है.

 

डोकलाम में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच करीब 2 महीने तक चली तनातनी के बाद उनके इस बयान को काफी अहम माना जा रहा है. लो झाहुई ने इस मौके पर अपने एक अध्यापक प्रोफेसर शू फैनचेंग को याद किया, जो 1945 से 1978 तक पुडुचेरी के अरविंदो आश्रम में रहे थे. उन्हें उपनिषद, भगवद गीता और शाकुंतला के संस्कृत से चीनी भाषा में अनुवाद के लिए जाना जाता है.