तीन पीढ़ियों से ये मुस्लिम परिवार बना रहा है पुतले

काशीपुर, बुराई पर अच्छाई का प्रतीक दशहरा विजय पर्व पर भगवान श्रीराम द्वारा लंका दहन के बाद रावण व उसके पुत्र मेघनाथ के वध के मंचन के बाद रविवार को दहन किये जाने वाले रावण मेघनाथ के पुतले व आतिशबाजी पूरी तरह तैयार कर ली गयी है. पुतलों को दहन के लिए रामनगर रोड की पायते वाली रामलीला परिसर में खड़े करने की तैयारी शुरू कर दी गयी है. इन पुतलों को तैयार करने में 40 दिन का समय लगा.

 

बतादें कि मेरठ के जैदी (मुस्लिम) परिवार की तीन पीढियों द्वारा पिछले करीब 51 वर्षो से यहां रावण, मेघनाथ के पुतलों के साथ ही लंका व आतिशबाजी आदि बनायी जाती रही है. पिछले चार वर्षों से लगातार काशीपुर में यह पुतले बनाने आ रहे यूपी के मेरठ जिले के मंजूर नगर स्थित जैदी फार्म निवासी मौ. महबूव ने बताया कि पूर्व में उनके भाई महमूद यहां रावण मेघनाथ आदि के पुतले बनाने आते थे, उससे पूर्व उनके पिता मौ. रियाजुद्दीन व उनके दादा मौ. समद यहां पुतले बनाने आया करते थे. उन्होंने बताया कि बचपन में वह अपने दादा व पिता के साथ यहां इस कार्य के लिए आया करते थे. उन्हीं से प्रेरणा लेकर व पुतले बनाना सीखने के बाद वह अपने भाई के साथ से यहां आ रहे हैं.

 

महबूब ने बताया कि उनके भाई महमूद की मृत्यु के बाद यह जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं ले ली. महबूब ने बताया कि इन पुतलों को बनाने में उन्हें 40 दिन का समय लगा है. 55 फिट ऊंचा रावण व 50 फिट ऊंचा मेघनाथ के पुतलों के अलावा 15 फिट की लंका बनाने में करीब एक लाख रूपये की लागत आयी है. उन्होंने बताया कि इन पुतलों को बनाने के लिए उनके पूरे परिवार के अलावा छह अन्य लोग भी उनके साथ आये हैं. उन्होंने बताया कि पूर्व में उनके पिता व दादा यहां आईजीएल व सूर्या रोशनी में भी पुतले बनाकर दिया करते थे.

 

उनकी मृत्यु के बाद वह केवल रामलीला कमेटी के लिए ही पुतले बनाते हैं, परंतु इस बार उन्होंने रावण का करीब 30 फिट ऊंचा एक पुतला गौशला हेमपुर डिपो में भी बनाकर दिया है. महबूब ने बताया कि अब से पूर्व इन पुतलों व लंका में उन्हें हाथ से कलर करना पड़ता था, परंतु इस बार रावण मेघनाथ व लंका में रेडियम कलर के कागजों का प्रयोग किया गया है, जो श्रद्धालुओं व दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहेंगे. उन्होंने बताया कि इन पुतलों के अलावा दहन के दौरान रंगीन आतिशबाजी कमेटी की और से जलायी जाएगी.

 

उन्होंने बताया कि पुतला दहन के दौरान यदि बरसात पड़ती है तो इस बार पुतले बनाने में एक विशेष प्रकार का कागज इस्तेमाल किया गया है जो बरसात के पानी से फटकर पुतला खराब नहीं होगा, बल्कि पुतले का कागज कुछ गीला जरूर हो जाएगा, परंतु दहन करने में कोई परेशानी नहीं होगी. इस जबाव में उन्होंने बताया कि बुराई पर अच्छाई का प्रतीक विजय दशमी पर्व के लिए रावण मेघनाथ के पुतले बनाकर वह गर्व महसूस करते हैं.