भारतीय सेना ने नगा विद्रोहियों पर की बड़ी कार्रवाई, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से इनकार

भारत-म्यांमार बॉर्डर के पास भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में कई नगा विद्रोही नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (NSCN-K) के आतंकी मारे गए हैं. भारतीय सेना के जवानों की तरफ से ये स्ट्राइक बुधवार तड़के की गई थी. पूर्वी कमान की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, भारतीय-म्यांमार सीमा के पास तैनात भारतीय सेना के एक दल पर सुबह 4:45 बजे पर NSCN-K के अज्ञात चरमपंथियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद भारतीय फौज की तरफ से फौरन कार्रवाई की गई, जिसमें नगा विद्रोहियो को काफी नुकसान पहुंचा है. इसके बाद चरमपंथियों ने कार्रवाई रोक दी और मौके से फरार हो गए.

हालांकि, सेना की तरफ से इस बात से इनकार किया गया है कि ये सर्जिकल स्ट्राइक थी, क्योंकि सेना की टुकड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार नहीं किया था. शुरुआती रिपोर्ट में ऐसा कहा गया कि कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन सेना की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय सेना के जवानों को इस ऑपरेशन में किसी तरह का कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ा.

हाल के हफ्तों में सेना की तरफ से एनएससीएन विद्रोहियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है, जिसका संचालन म्यांमार से किया जा रहा है. बुधवार को उसपर की गई कार्रवाई इसका एक हिस्सा हो सकता है. हालांकि, सेना की तरफ से मुठभेड़ की सही जगह बताने से इनकार किया गया है, लेकिन ऐसी रिपोर्ट है कि अरुणाचल प्रदेश से लगते भारत के पूर्वी सीमा पर ये कार्रवाई हुई है. इससे पहले, 10 जून 2015 को सेना के जवानों ने सीमा पार कर नगा विद्रोहियों के आतंकी कैंपों को ध्वस्त कर दिया था. सेना की तरफ से यह कार्रवाई मणिपुर के चंदेल जिले में सेना के काफिले पर हुए हमले के छह दिन बाद की गई. इस हमले में सेना के 18 जवान शहीद हो गए थे.

दरअसल, नागालैंड के कई अलगाववादी गुट पिछले कई सालों से भारत से अलग होने की मांग करते आए हैं. इन सभी गुटों ने मिलकर 31 जनवरी 1980 को नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल ऑफ नागालैंड नाम का एक संगठन बनाया है, लेकिन बाद में इस गुट में फूट पड़ गई. जिसके बाद 30 अप्रैल 1988 को एनएससीएन खापलांग ने अपना अलग गुट बना लिया. ये गुट सालों से भारत से अलग होने की मांग पर अड़ा हुआ है. पिछले दिनों भारत सरकार ने नागालैंड में सक्रिय तमाम दूसरे अलगाववादी गुटों से बातचीत शुरू की और उन्हें शांति समझौता में शामिल किया.