तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत हो सकती है संदिग्ध, जांच शुरू

J Jayalalitha

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की वजह अब भी एक पहेली बनी हुई है. 5 दिसंबर 2016 को चेन्नै के अपोलो अस्पताल में उनकी मौत के बाद कई तरह के सवाल उठे हैं. उनकी पार्टी एआईएडीएमके की तरफ से भी मौत की असल वजह पता कराए जाने की मांग अक्सर उठी. तकरीबन 3 महीने तक जयललिता अपोलो अस्पताल में ही भर्ती रही थीं. अब उनकी मौत के 9 महीने बाद तमिलनाडु की ई पलनिसामी सरकार ने इस सिलसिले में एक जांच आयोग गठित कर दिया है.

रिटायर्ड जज ए अरुमुगासामी की अगुवाई में इस मामले की न्यायिक जांच के लिए जांच आयोग का गठन किया गया है. इससे पहले डेप्युटी सीएम ओ पन्नीरसेल्वम भी कई बार मांग कर चुके थे कि जयललिता की मौत की जांच होनी चाहिए. जयललिता की मौत से पहले उनसे मिलने की किसी को इजाजत नहीं थी. उनकी सहयोगी शशिकला ही अस्पताल में उनके पास थीं. इसको लेकर भी सवाल खड़े हुए.

29 दिसंबर 2016 को तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत पर मद्रास हाई कोर्ट के एक जज ने सनसनीखेज टिप्पणी की. मद्रास हाईकोर्ट के जज ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि उन्हें भी जयललिता की मौत पर कई संदेह हैं.

हाईकोर्ट के जज जस्टिस वैद्यलिंगम ने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की थी. जस्टिस वैद्यलिंगम ने कहा, ‘जब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया तो यह कहा गया कि वह नियमित तौर पर भोजन ले रही हैं. कम से कम उनकी मौत के बाद अब तो सच्चाई सामने आनी चाहिए.’जस्टिस वैद्यलिंगम ने कहा, ‘मीडिया ने बहुत सारी आशंकाएं जाहिर की थीं. व्यक्तिगत तौर पर मुझे भी उनकी मौत के बारे में कुछ आशंकाएं हैं.’

गौरतलब है कि 5 दिसंबर 2016 को रात 11.30 बजे चेन्नई के अपोलो अस्पताल में जयललिता का निधन हो गया था. वह तकरीबन ढाई महीने तक अस्पताल में भर्ती रही थीं. उन्हें 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि अपोलो अस्पताल की तरफ से उनकी मौत के कुछ दिन पहले कहा गया कि जयललिता ठीक हो चुकी हैं और वह जब चाहें अस्पाल से छुट्टी ले सकती हैं.