तो ऐसा दिखता था गुरमीत राम रहीम जब संभाली डेरे की गद्दी

23 सितंबर 1990 को गुरमीत राम रहीम ने डेरा सच्चा सौदा की गद्दी संभाली थी. इस दिन को यादगार मनाने के लिए इससे पहले तक डेरे में शानदार जलसा आयाजित किया जाता रहा है. इस बार डेरे का मुखिया 27वीं गद्दी सालगिरह रोहतक की सुनारियां जेल में बंद है.

डेरे की चैयरपर्सन विपश्यना ने दो दिन पहले हुई पुलिस पूछताछ में कहा है कि इस बार कोई कार्यक्रम नहीं होगा. इस बीच राम रहीम के कुछ रेयर फोटो सामने आए हैं, जिसमें वो तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह के साथ नजर आ रहा है.

गुरमीत राम रहीम सिंह के नाम जाने जाते डेरा सच्चा सौदा प्रमुख का जन्म 15 अगस्त 1967 को नही, बल्कि 10 जुलाई 1967 को पंजाब की तहसील अबोहर के गांव की करखेड़ा में अपनी ननिहाल में हुआ था और नाम भी हरपाल सिंह रखा गया था. बाद में माता नसीब कौर की कोख से जन्मा हरपाल सिंह नामक बालक का नाम राजस्थान के श्रीगंगानगर के गांव गुरुसर मोदिया में पिता मग्घर सिंह व दादा चेत सिंह के घर जाकर गुरमीत सिंह बन गया.

एक दावे के मुताबिक बालक गुरमीत के बारे में त्रिवेणीदास नामक साधू ने पहले ही घोषणा कर दी कि यह सिर्फ 23 साल तक ही मां-बाप के पास रहेगा.

  • 7 साल की उम्र में 31 मार्च 1974 को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह जी ने नामदान दिया और यह उनके डेरे में सेवा करने लग गया.
  • 23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया और गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया.
  •  गुरमीत सिंह ने अपने नाम में तीन नए शब्द राम-रहीम और इंसां भी जोड़ लिए और नाम हो गया गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां.

ये है डेरे का इतिहास

  •  गुरमीत के धार्मिक चरित्र की तो यह जेल में जाने से पहले तक उस डेरे के तीसरे गद्दीनशीं थे, जिसकी शुरुआत एक झोंपड़े से हुई थी. 1948 में 29 अप्रैल को पाकिस्तान के बलोचिस्तीन मूल के साधू शाह मत्तन उर्फ मस्ताना बाबा ने सिरसा के बेगू गांव से पहले जंगल को साफ कर डेरा बना धर्मोपदेश शुरू किया था.
  •  गुरु सावन सिंह के शिष्य मत्तन शाह बलोचिस्तानी की ख्याति दूर-दूर तक फैलने लगी. 1960 में उन्होंने शरीर छोड़ दिया तो डेरे की जिम्मेदारी अकूत संपत्ति छोड़कर साधू बने बड़े जमींदार सतनाम सिंह के कंधों पर आ गई.
  •  डेरे के दूसरे शाह सतनाम सिंह की मैनेजर गुरबख्श सिंह (जगमालवाली) के साथ मलकियत को कानूनी लड़ाई चली और कोर्ट के फैसले सतनाम सिंह के हक में आए. मैनेजर ने जगमालवाली में डेरा बना लिया. दिल्ली के लॉरेंस रोड में भी उनका रुहानी आश्रम है. उधर, सतनाम सिंह 1990 तक गद्दीनशीं रहे और फिर 23 सितंबर 1990 को गुरमीत सिंह गद्दी पर बैठ गए.
  •  गुरमीत सिंह ने लगभग 10 किलोमीटर आगे विशाल डेरा बनाया. इस रास्ते में सड़क के दोनों तरफ की अधिकतर जमीन बाद में डेरे ने खरीद ली.