‘बिना किसी देरी के एक साल में कर दिया जाएगा कालागढ़ निवासियों का पुनर्वास’

उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बताया कि जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अति संवेदनशील क्षेत्र कालागढ़ में रहने वाले लोगों का पुनर्वास एक वर्ष के भीतर कर दिया जाएगा.

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ को सूचित किया गया कि सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों को बिना किसी देरी या चूक के लागू किया जाएगा.

उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया, ‘निवासियों को हटाया जाएगा और जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से यथासंभव शीघ्रता से ढ़ांचों को गिराया जाएगा और यह काम किसी भी मामले में एक वर्ष से ज्यादा नहीं चलेगा.’

निवासियों के पुनर्वास की मांग को लेकर दाखिल याचिका का निस्तारण करते हुए पीठ ने कहा, ‘क्षेत्र के उपायुक्त को न्यायाधिकरण के समक्ष आदेशों में निहित निर्देशों के अनुपालन में प्रगति को बताने के लिए हर तीन महीने में स्थिति-सह अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी.’

एनजीटी ने इससे पूर्व उत्तर प्रदेश सरकार की निंदा की थी जिसके सिचाई विभाग ने अलग उत्तराखंड राज्य बनाए जाने से पहले कालागढ़ में एक आवासीय कॉलोनी का निर्माण किया था. एनजीटी ने इन कॉलोनियों से निवासियों को हटाये जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की थी.

शीर्ष अदालत ने दिसम्बर 2013 को उत्तर प्रदेश के सिचाई विभाग को निर्देश दिया था कि आवासीय कॉलोनियों को खाली कराकर छह महीने के भीतर उत्तराखंड सरकार के हवाले कर दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष यह मामला एनजीटी को सौंप दिया था.