नहीं रहे रूसी कर्नल स्तेनिस्लाव पेत्रोव, अपनी समझदारी से टाला था परमाणु युद्ध

मॉस्को|…. 26 सितंबर 1983 को रूस के कर्नल स्तेनिस्लाव पेत्रोव ने अपनी मानवीय समझ की बदौलत पूरी दुनिया को परमाणु युद्ध के भीषण खतरे से बचाया था. उस वक्त पेत्रोव की उम्र 44 साल थी और वह रूस के एयर डिफेंस फोर्स में बतौर कर्नल तैनात थे. उनकी शिफ्ट खत्म होने में अभी कुछ वक्त बचा था जब रडार स्क्रीन पर अलॉर्म बजने लगा. मॉस्को के सीक्रिट कमांड सेंटर से अमेरिका पर उन दिनों रूस नजर रखा करता था.

कंप्यूटर अलॉर्म पर 5 बैलिस्टिक मिसाइल अमेर आइकन बेस से लॉन्च होने की खबर आई. पेत्रोव ने उस दिन के बारे में बताया था, ’15 सेकेंड के लिए हम पूरी तरह से शॉक की स्थिति में थे. उस वक्त हमें क्षण भर में फैसला लेना था कि अब अगला कदम क्या होना चाहिए. मेरे एक हाथ में फोन और दूसरे में इंटरकॉम था. सामने स्क्रीन पर इलेक्ट्रॉनिक मैप फ्लैश कर रहा था. उसी वक्त मैंने फैसला किया कि मिसाइल लॉन्च की यह सूचना गलत हो सकती है.’ इसी साल 19 मई को 79 साल की उम्र में ‘दुनिया बचाने वाले’ के नाम से मशहूर कर्नल पेत्रोव ने संसार को अलविदा कह दिया. उनकी मौत के खबर की पुष्टि उनके बेटे ने की. उनकी मौत के बारे में दुनिया को काफी बाद में बेटे द्वारा पुष्टि करने पर ही पता चला. जीवन के आखिरी दिनों में पेत्रोव मॉस्को के पास गांव में अकेले ही जीवन बिता रहे थे. वह रूसी सरकार से मिलने वाली पेंशन पर आश्रित थे.

पेत्रोव उस वक्त स्टेशन इंचार्ज थे और उन पर सारी जिम्मेदारी थी. अपने फैसले के बारे में कहते हैं कि मैंने यह फैसला अपने अंदर की आवाज को सुनकर किया था. यह पूरी तरह से 50-50 वाला मामला था. इतिहासकारों का मानना है कि कर्नल पेत्रोव के ठंडे दिमाग और सूझबूझ से भरे फैसले ने पूरी दुनिया को भयानक तबाही से बचाया.

वॉशिंगटन पोस्ट को दिए अपने एक इंटरव्यू में कर्नल ने कहा था, ‘जब लोग एक युद्ध की शुरुआत करते हैं तो यह सिर्फ 5 मिसाइलों के बीच ही नहीं रहता.’ उस वक्त बजे गलत अलॉर्म के बारे में बाद में पता चला कि यह मिसाइल लॉन्च के कारण सूरज की किरणों के प्रभाव से था. कर्नल पेत्रोव की इस समझदारी के बारे में दुनिया को 1998 में सोवियत मिसाइल डिफेंस के एक कमांडर की लिखी किताब के प्रकाशन के बाद पता चला.