देहरादून : किडनी प्रकरण का दूसरा सूत्रधार गिरफ्तार

देहरादून, विगत दिनों लालतप्पड़ में किडनी खरीद- फरोख्त (ट्रांसप्लांट) प्रकरण में थाना डोईवाला पुलिस मुकदता पंजीकृत कर फरार चल रहे अभियुक्त राजीव कुमार चौधरी पुत्र स्व. सुरेन्द्रपाल पाल सिंह आदर्श नगर बिनोली रोड बडौत बागपत को मय कार होण्डा नंबर डीएल 8 सीएनबी 0010 के रविवार को मुखबीर की सूचना पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय गेट के सामने गली नं-02 हरिपुर कलां थाना रायवाला के पास से गिरफ्तार कर लिया गया. राजीव चौधरी राज्य छोडकर भागने की फिराक में था. राजीव चौधरी की कार की डिग्गी से बरामद एक कम्प्यूटर कैबनेट जिस पर एएसयूएस का डीवीडी राईडर लगा है एवं पीले रंग की गत्ते की फाईल मिली, जिसमें कॉलेज से सम्बन्धित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज व मेडिकल रिपोर्ट है. राजीव का जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. राजीव के पिता बीडीओ थे तथा राजीव ने अपनी पढाई बडौत से ही शुरू की थी.

उसने बीएसी एग्रीकल्चर एवं फिर एमए एक्नोमिक्स किया. सन् 1998 में उसने स्नेह से शादी की जिससे उसको एक बेटा है फिर वर्ष 2000 में उसका तलाक हो गया. वर्ष 2004 में दूसरी शादी अर्चना से की जिससे एक लडकी हुई तथा वर्ष 2013 में उसका फिर से तलाक हो गया, फिर वह अनुपमा के सम्पर्क में आया जो पहले से तलाकशुदा थी. दोनों ने वर्ष 2014 में विवाह कर लिया. राजीव शुरू से जल्दी – जल्दी पैसा कमाना चाहता था. वर्ष 1999 में उसने हरिद्वार में बीएसएनएल अन्डर ग्राउण्ड केबिल बिछाने का टैण्डर लिया था. टैण्डर खत्म होने के बाद वह हरिद्वार में प्रोपर्टी डीलिंग का कार्य करने लगा. फिर उसके बाद उसने लक्सर में खनन का काम भी शुरू कर दिया और साथ -साथ प्रोपर्टी डीलिंग का कार्य भी करता रहा. वर्ष 2005 में अपने एक मित्र अब्बास, जो कि अब दुबई में रहता है, के माध्यम से राजीव की जान-पहचान डॉ. अमित से हुई.

राजीव ने अपनी पत्नी अनुपमा को नेचरविला में मैनेजर की नौकरी दिलायी और यहां से इनकी उत्तरांचल डेन्टल कॉलेज के चेयरमेन पाण्डे से भी जान-पहचान हो गयी. वर्ष 2016 में डॉ. अमित ने जब राजीव से देहरादून में एक हॉस्पिटल खोलने की बात कही तो राजीव चौधरी ने उत्तरांचल डेन्टल कॉलेज के चेयरमैन पाण्डे से बात कर जुलाई 2016 में डॉ. अमित को गंगोत्री चेरिटेबिल हॉस्पिटल लालतप्पड की बिल्डिंग को लीज पर दिलाया. उसके बाद राजीव चौधरी के द्वारा ही उक्त हॉस्पिटल की फिनिशिंग की गयी जिसमें कि डॉ. अमित का एक साथी भी शामिल था. इन लोगों के द्वारा ही उक्त हॉस्पिटल में सम्पूर्ण सामान लगाया गया. 3 – 4 महीने में कार्य खत्म होने पर राजीव चौधरी डॉ. अमित के साथ इस हॉस्पिटल को चलाने लगा. जब हॉस्पिटल से मोटी कमाई होने लगी तो राजीव चौधरी ने अपनी पत्नी को वहां पर कैन्टीन भी दिला दी. राजीव चौधरी सम्पूर्ण किडनी प्रकरण में सम्मिलित था, उसके द्वारा ग्राहकों को हॉस्पिटल में लाया जाता था, जिससे राजीव चौधरी को हॉस्पिटल से अच्छी कमाई होने लगी. राजीव चौधरी की चल – अचल सम्पत्ति एवं आपराधिक इतिहास की अन्य जानकारी प्राप्त की जा रही है.