भारत-जापान मिलकर भी हमें चुनौती नही दे सकते: चीन 

गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने 1.08 लाख करोड़ रुपये (17 अरब डॉलर) की लागत वाली महत्वाकांक्षी अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी. लेकिन भारत और जापान की बढ़ती दोस्ती को देखकर चीन नाराज हो गया है. इस बारे में चीनी मीडिया ने लिखा कि ये दोनों देश मिलकर भी चीन को चुनौती नही दे सकते हैं और इसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है.

चीनी मीडिया के ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में लिखा गया कि आज के संदर्भ में भारत-जापान की नजदीकी एक किस्म का जुगाड़ है. डोकलाम विवाद के बाद भारत की ओर से अमेरिका और जापान से रिश्ते प्रगाढ़ करने की कोशिश चीन के सामने भारत की रणनीतिक असुरक्षा को दर्शाती है. पहले से ही कहा जा रहा है कि जापान पीएम का ये दौरा भारत की ओर से चीन को जवाब है.

चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स की संपादकीय रिपोर्ट के मुताबिक जबतक चीन का समाज मानसिक रुप से मजबूत है, जापान और भारत की मीडिया में दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने के गुहार का कोई असर नहीं होगा. इस बात की बहुत कम संभावना है कि भारत और जापान अमेरिका के साथ मिलकर एक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन का निर्माण करेंगे. शक्तिशाली चीन को इस बात का भरोसा है कि कोई भी एशियाई देश चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती नहीं दे सकता है, ना कुछ एशियाई देश आपस ग्रुप बनाकर चीन को चुनौती दे सकते हैं. चीन के रणनीतिज्ञों का मानना है कि चीन की अर्थव्यस्था वैश्विक पटल पर जिस हालात का निर्माण करती है उसे चुनौती देना नामुमिकन है.

ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन को अपना मुख्य फोकस डेवलपमेंट पर रखना चाहिए. चीन भारत और जापान की नकल नहीं करेगा जो एक तरह से अपने आप को हार चुके हैं. भारत के लोग जापान और अमेरिका से अपनी दोस्ती की डीगें हांककर दुनिया को बताना चाहते हैं कि चीन के लिए भारत का महत्व कितना ज्यादा है. दरअसल ये प्रोपगैंडा भारतीय मानसिकता को पसंद आता है.