देहरादून किडनी रैकेट के तार विदेशों तक! सात के खिलाफ लुकआउट नोटिस

उत्तराखंड पुलिस ने अस्थायी राजधानी देहरादन में किडनी प्रतिरोपण रैकेट में कथित रूप से शामिल सात लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. पुलिस ने इसके साथ ही किडनी रैकेट के तार विदेशों से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन कर दिया है.

सोमवार को इस मामले में गिरफ्तार किडनी रैकेट के कथित दलाल जावेद से पूछताछ के आधार पर सात लोगों के नाम सामने आए थे, जिनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया. पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नेपाली फार्म तिराहे और भानियावाला के बीच स्थित गंगोत्री चैरिटेबल अस्पताल में गैरकानूनी रूप से निकाले जा रहे गुर्दों को ओमान जैसे समृद्ध देशों से आने वाले अमीर लोगों में प्रतिरोपित किया जा रहा था और इसके लिए उनसे मोटी रकम वसूली जा रही थी.

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने इस बात को स्वीकार किया कि विदेशों से इस किडनी रैकेट के जुड़े होने की बात सामने आयी है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी मामले की पड़ताल की जा रही है, जिसके बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी.

रतूड़ी ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है जो हर पहलू से तफ्तीश कर उसकी तह तक पहुंचेगी. इस टीम की कमान देहरादून जिले की पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सरिता डोभाल को सौंपी गई है.

राज्य पुलिस प्रमुख रतूड़ी ने कहा, ‘मामले की गंभीरता को देखते हुए मैंने निर्देश दिए हैं कि इसकी जांच एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की अगुवाई में हो. मामले की जांच एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी सरिता डोभाल को दी गई है.’ रतूड़ी ने कहा कि इस मामले में अभी तक एक गिरफ्तारी हुई है, लेकिन डॉक्टरों तथा अस्पताल स्टाफ सहित इससे जुड़े अन्य लोगों को पकड़ने के लिए पुलिस की विभिन्न टीमें कई स्थानों पर भेज दी गई हैं.

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर पता चला है कि कोई डॉक्टर अमित तथा उसका बेटा इस रैकेट को चला रहे थे, हांलांकि, उनके नाम बदलकर छद्म नामों से काम करने की बात भी सामने आई है.

रतूड़ी ने बताया कि यह भी पता चला है कि अस्पताल के मालिक ने यह अस्पताल लीज पर चलाने के लिए आरोपियों को दिया था और पुलिस मालिक की भूमिका की भी जांच करेगी.

इस मामले के सोमवार को हुए सनसनीखेज खुलासे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लाल तप्पड़ के जंगलों से मुंबई निवासी कथित दलाल जावेद को गिरफ्तार किया था.

देहरादून की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती ने बताया कि जावेद से पूछताछ के आधार पर सात व्यक्तियों के नाम सामने आए थे, जिनके खिलाफ पुलिस ने लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है.

उन्होंने बताया कि देहरादून पुलिस की तरफ से जारी यह लुकआउट नोटिस देश की सभी अंतरराष्टीय सीमाओं और हवाई अड्डों पर भिजवा दिया गया है ताकि वे देश छोड़कर नहीं जा सकें.

इस रैकेट का खुलासा होने के वक्त कोलकाता निवासी महिला 30 वर्षीय कृष्णा दास और इसी उम्र के शेख ताज अली के एक-एक गुर्दे निकाले जा चुके थे, जबकि कोलकाता की ही 30 वर्षीया सुषमा एवं गुजरात के भाईजी भाई के गुर्दे अभी निकाले जाने थे.

ये सभी कथित गुर्दा डोनर्स आठ और नौ सितम्बर को ही अस्पताल पहुंचे थे. इन सभी को कोलकाता की एक दलाल महिला ने मोबाइल फोन देकर पहले दिल्ली भेजा. दिल्ली में किडनी रैकेट के अज्ञात लोगों से मुलाकात होने के बाद उन्होंने इनके मोबाइल फोन वापस ले लिए और इन्हें लाल तप्पड़ भेज दिया.

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब गुर्दे देने के बाद तय रकम न मिलने पर कृष्णा और अली ने अस्पताल में हंगामा कर दिया और इसकी सूचना पास ही स्थित लाल तप्पड पुलिस चौकी तक पहुंच गई.

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अपने शिकंजे में कितने लोगों को फंसाकर उनके गुर्दे अवैध रूप से निकाल लिए.