ये थी सुनील दत्त- नर्गिस की अंतिम इच्छा, संजू बाबा ने की पूरी

वाराणसी, बुधवार को बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने काशी में अपने माता-पिता का पिंडदान किया. संजय ने खुलासा करते हुए बताया कि ‘पिता की इच्छा थी कि आजाद होने के बाद काशी में दोनों का पिंडदान जरूर करूं.’ उन्होंने कहा कि ‘आज मैने अपने मम्मी-पापा की आखिर इच्छा पूरी करने यहां आया हूं.’

गौरतलब है कि पितृ पक्ष में काशी में आकर पितरों की आत्मा के शांति के लिए पिंडदान किया जाना शुभ माना जाता है. मान्यता यह भी है कि इसे करने मात्र से पीढ़ी दर पीढ़ी मृतक आत्माओं की तृप्ति हो जाती है. इसी आस्था को दिल में लेकर मुम्बई से काशी के आदमपुर क्षेत्र स्थित रानीघाट पहुंचे जाने माने फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त ने अपने पिता स्व.संजय दत्त और मां स्व. नर्गिस की आत्मा के तृप्ति के लिए गंगा तट पर पिंडदान कर मां गंगा का अभिषेक किया. हालांकि अपने चहेते कलाकार को अपने बीच पाकर काशी की जनता भी उनकी एक झलक को अपने कैमरे में उतारने के लिए आतुर दिखाई पड़ी.

वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचने के बाद सीधा विश्व प्रसिद्ध रानीघाट पहुंचे फ़िल्म अभिनेता संजय दत्त ने सिद्ध विनायक मंदिर के महंत राजेन्द्र कुमार शर्मा के सानिध्य में गंगा तट पर अपने पिता फ़िल्म अभिनेता व कांग्रेस के पूर्व सांसद स्व. सुनील दत्त के आत्मा के शांति के लिए पिंडदान किया. पिंडदान के बाद मीडिया से बातचीत में संजय ने कहा कि पिंडदान करना बहुत जरूरी था और पिता जी ने कहा था कि ‘जब आजाद हो जाओगे तो मेरा पिंडदान कर देना और उनकी इसी ख्वाहिश को पूरा करने यहां आया हूं.’

पिंडदान करवाने वाले सिद्ध विनायक मंदिर के महंत पंडित राजेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि इनके पिता स्व. सुनील दत्त के समय से हम इनके यहां से जुड़े है और आज यहां संजय दत्त ने अपने पिता सहित पितरों के आत्मा के तृप्ति के लिए पार्वण श्राद्ध किया. इसके पश्चात उन्होंने 8 शंखनाद के बीच मां गंगा का अभिषेक किया.