IIT Roorkee उत्तर भारत के कई शहरों में लगाएगी भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली

उत्तराखंड में भूकंप की पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) के पायलट परियोजना की सफलता से उत्साहित आईआईटी रुड़की इसे पूरे उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में लगाने पर काम कर रहा है. भारत में अपनी तरह की यह पहली परियोजना संस्थान द्वारा भूकंप अभियांत्रिकी के क्षेत्र में किए जा रहे शोध का हिस्सा है तथा हिमालयी क्षेत्र में चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट की ही अगली कड़ी है.

वर्ष 2015 में शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड में गढ़वाल हिमालय के भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की मदद से 84 सेंसर लगाने वाला आईआईटी रुड़की पहला संस्थान था.

मौके पर लगे ये सेंसर भारत संचार निगम लिमिटेड और उत्तराखंड सरकार के स्वान नेटवर्क की सहायता से संस्थान में लगे कम्प्यूटर सर्वर में डाटा पहुंचा देते हैं, जिसे प्रोसेस कर छह या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप की पूर्व चेतावनी जारी की जाती है.

क्षेत्र में उच्च तीव्रता के भूकंप आने की पूर्व चेतावनी देने के लिए इस सर्वर से जुड़े सायरन आईआईटी रुड़की परिसर में लगाए गए हैं. यह परियोजना इस साल मार्च में पूरी हो गई है. इस पायलट परियोजना के सफलतापूर्वक पूरे होने पर उत्तराखंड सरकार ने आईआईटी रुड़की के लिए मौजूदा भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के रख रखाव, कुमांऊ क्षेत्र में 100 सेंसर लगाने, देहरादून तथा सभी जिला मुख्यालयों में स्थापित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्रों में सायरन लगाने तथा देहरादून और हल्द्वानी में 100 सेंसर लगाने की एक परियोजना को स्वीकृति दे दी है.

आईआईटी रुड़की के भूकंप अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर एमएल शर्मा ने कहा, ‘भारत के भूकंप मानचित्र को देखें तो पता चलता है कि उत्तर भारत के ज्यादातर शहर उच्च या मध्यम तीव्रता के भूकंप के खतरे में हैं. हिमालयी क्षेत्र में हमारे अध्ययन का उद्देश्य एक ऐसा तंत्र विकसित करना था जिससे लोगों की जान बचायी जा सके. भूकंप की भविष्यवाणी करना असंभव है, लेकिन एक साधारण पूर्व चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को समय रहते एक सुरक्षित और खुले स्थान में पहुंचने की सूचना देकर उनकी जान बचायी जा सकती है.’ उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद हम इसे पहली बार लोगों के लिये देहरादून और हल्द्वानी में लगाने जा रहे हैं.