एनपीएस में शामिल होने की उम्र 65 वर्ष तक बढ़ी

सोमवार को पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण ने राष्ट्रीय पेंशन योजना में जुड़ने की ऊपरी आयु सीमा को मौजूदा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की घोषणा की.

पीएफआरडीए के अध्यक्ष हेमंत कांट्रक्टेर ने ‘वृद्धावस्था फंड को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में स्थांतरित करने’ के कार्यक्रम के दौरान कहा कि पेंशन नियामक बोर्ड ने पहले ही इस बदलाव को हरी झंडी दे दी है और जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी.उन्होंने कहा कि एनपीएस में अभी 18 से 60 वर्ष के उम्र के लोग शामिल हो सकते हैं और हमारे बोर्ड ने उम्रसीमा बढ़ाकर 65 वर्ष तक करने को मंजूरी दे दी है.

उन्होंने कहा कि इस योजना में उम्रसीमा बढ़ाए जाने का विकल्प है और उम्रसीमा बढ़ाकर 70 वर्ष तक करने की योजना है.पेंशन में रिफॉर्म करने के सरकार के निर्णय के पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पोर्टेबिलिटी को बढ़ाना या एनपीएस में वृद्धावस्था फंड को स्थांतरित कर इसे ज्यादा आकर्षक और ग्राहकों के लिए आसान बनाना है. कांट्रेक्टर ने कहा कि हमारा उद्देश्य ऐसे सेक्टर के लिए पेंशन योजना शुरू करना है जहां यह उपलब्ध नहीं है.केवल 15 से 16 प्रतिशत कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिल रहा है, क्योंकि भारत में लगभग 85 प्रतिशत कर्मचारी असंगठित और अनियमित क्षेत्रों में काम करते हैं.

क्या है राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS)
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) भारत सरकार की ओर से की गई एक पेंशन-योजना है. शुरुआत में यह सरकार में भर्ती होने वाले नए व्‍यक्तियों (सशस्‍त्र सेना बलों के अलावा) के लिए तय की गई थी. बाद में इसे स्‍वैच्छिक आधार पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों सहित देश के सभी नागरिकों को दी जाने लगी है. इस योजना के सहारे सरकार ने स्वयं को पेंशन की जिम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश की है.

सरकार की भूमिका केवल शुरुआती दौर में बराबर के अंशदाता के रूप में है. कर्मचारी और सरकार के अंशदान से जमा हुए राशी निश्चित वित्तिय संस्थानों को मिलती है. जिसका वे दिए गए निर्देशों के तहत प्रबंधन करते हैं.