कैलाश-मानसरोवर यात्रा संपन्न, आखिरी जत्था भी वापस लौटा

कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं का आखिरी जत्था शुक्रवार सुबह तिब्बत से भारतीय सीमा में लौट आया. इसके साथ ही उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे के जरिए होने वाली इस तीर्थयात्रा का समापन हो गया. तैंतीस श्रद्धालुओं वाले आखिरी जत्थे ने सुबह सात बजे लिपुलेख दर्रे से भारतीय सीमा में प्रवेश किया.

यात्रा की नोडल एजेंसी कुमांऊ मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीरज गर्ब्याल ने बताया कि 34 सदस्यीय आखिरी जत्थे में शामिल एक तीर्थयात्री के बीमार होने के कारण वह तिब्बत के दार्चिन शिविर से पहले ही वापस आ गया था.

इस जत्थे ने शुक्रवार शाम गुंजी शिविर में विश्राम किया, जहां से शनिवार को उसे राज्य सरकार के हेलीकाप्टरों के जरिए धारचूला आधार शिविर लाया जाएगा. गुंजी से मांगती तक सड़क मार्ग बाधित होने के कारण यात्रियों को हवाई मार्ग से धारचूला लाया जाएगा. गर्ब्याल ने कहा कि इस जत्थे के 11 सितंबर तक दिल्ली पहुंच जाने की संभावना है.

इस वर्ष लिपुलेख दर्रे के जरिए यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले सालों के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए.

निगम के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि भारत और चीन के बीच डोकलम गतिरोध के चलते चीन के अधिकारियों द्वारा नाथुला दर्रे के जरिए तीर्थयात्रियों को जाने की अनुमति न दिए जाने के बाद लिपुलेख के जरिये देश के 24 राज्यों के 919 श्रद्वालु कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए.