पिथौरागढ़ : पैसों की कमी के कारण बंद हुआ आदिवासी बच्चों के लिए बना स्कूल

उत्तराखंड में रहने वाली अकेली पुरातन जनजाति ‘बन रावत’ के बच्चों के लिए केंद्र सरकार की मदद से राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से खोले गए एकमात्र आवासीय विद्यालय के धन की कमी के कारण बंद हो जाने के कारण उसके 50 से ज्यादा बच्चे प्राथमिक शिक्षा से वंचित हो गए हैं.

‘बन राजी’ के नाम से ज्यादा मशहूर उत्तराखंड में रहने वाली इस जनजाति के सदस्यों की संख्या तेजी से कम हो रही है. यह आवासीय विद्यालय राज्य के राज्य कल्याण विभाग द्वारा केंद्र की मदद से भारत-तिब्बत सीमा के पास जौलजीबी में साल 2001 में खोला गया था, लेकिन इसे चलाने वाले गैर सरकारी संगठन ‘सीमांत जनजाति विकास संस्थान’ द्वारा समय पर धन न मिलने का हवाला देकर इससे हाथ पीछ खींच लेने के बाद यह बंद हो गया है.

जौलजीबी में कार्य करने वाली समाजसेविका लीला बंग्याल ने बताया, ‘किल्मखोला, गनागांव और चिफलतारा तथा जौलजीबी बाजार के आसपास के सात अन्य गांवों में रहने वाले गरीब बनराजी परिवारों के बच्चों को इस सत्र से प्राथमिक श़िक्षा नहीं मिल पा रही है. मार्च में स्कूल की व्यवस्था देखने वाले गैर सरकारी संगठन के चले जाने से स्कूल शिक्षक विहीन हो गया है और खाने ​की व्यवस्था भी ठप्प पड गई है.’ लीला इस मसले पर जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक स्थानीय प्रतिनिधिमंडल के साथ शुक्रवार को पिथौरागढ़ आयी थीं.

इस संबंध में पिथौरागढ के जिलाधिकारी सी. रविशंकर ने कहा, ‘जिला प्रशासन ने स्कूल के शिक्षकों की तनख्वाह व अन्य खर्चों के लिए राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है और हमें उम्मीद है कि इस संबंध में हमें जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी.’