तो इसलिए पाक में आतंकी आका बना रहे हैं राजनीतिक पार्टियां

मौजूदा समय में आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की ओर से दबाव बढ़ता जा रहा है. हाल ही में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने तो सीधे-सीधे पाकिस्‍तान पर वार करते हुए आतंकियों को पनाह देने के लिए लताड़ा था. वहीं अब ये खबर आ रही है कि पाकिस्‍तान स्थित आतंकी संगठनों ने अपने बचाव के लिए एक नया रास्‍ता तलाश लिया है.

एक खबर के अनुसार, अब ये संगठन सुरक्षा कवच के तौर पर अपनी राजनीतिक पार्टियां बना रहे हैं. तभी तो जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद द्वारा अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने के कुछ हफ्तों बाद ही अब अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जा चुके फजलुर रहमान खलिल ने अपनी पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है. वहीं इस नए चलन की वजह से भारतीय खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले ही खलिल ने पाकिस्तानी मीडिया को यह जानकारी दी है कि वह अपनी पार्टी बना रहा है, जिसका नाम इसलाह-ए-वतन होगा. पाकिस्तान में राजनीतिक पार्टी बनाने का यह चलन अमेरिका द्वारा जमात-उद-दावा और अन्य आतंकी संगठनों पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के बाद आया है.

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, राजनीतिक पार्टी बनाने से इन आतंकवादियों को एक कवच मिल जाता है और इनका संगठन भी मुख्यधारा में बना रहता है. एक अधिकारी ने बताया कि ऐसा करने से न सिर्फ आतंकवादी संगठनों को पश्चिमी देशों के पाकिस्तान पर बढ़ते दबाव से छुटकारा पाने में मदद मिलती है, बल्कि उन्हें अपने छिपे मकसदों को कानूनी तौर पर अंजाम देने में भी आसानी होती है. एक बार राजनीतिक पार्टी आती है तो सभी प्रतिबंधित सदस्य कानूनी रूप से वैध पार्टी के सदस्य बन जाते हैं.