विपक्ष ने नोटबंदी को बताया ‘राष्ट्रविरोधी’, कहा- माफी मांगें पीएम मोदी, RBI को शर्म आनी चाहिए

सांकेतिक चित्र

नोटबंदी के फैसले को ‘राष्ट्रविरोधी’ बताते हुए विपक्षी दलों ने बुधवार को इस कदम को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया. पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने रिजर्व बैंक की तरफ से जारी आंकड़ों का इस्तेमाल उस पर निशाना साधने के लिए करते हुए कहा कि बंद किए गए करीब एक फीसदी नोट वापस नहीं आना ‘आरबीआई के लिए शर्म की बात है’.

कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि यह कदम ‘भारी आपदा’ है, जिससे ‘निर्दोष लोगों की मौत हुई’ और अर्थव्यवस्था को ‘तबाह’ कर दिया. ‘क्या प्रधानमंत्री अपराध स्वीकार करेंगे’.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि नोटबंदी से न केवल आरबीआई की संस्थागत शुचिता पर धब्बा लगा है, बल्कि विदेशों में भारत की विश्वसनीयता पर भी बट्टा लगा है.

चिदंबरम ने नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या नोटबंदी का फैसला काले धन को सफेद करने के लिए तैयार किया गया था.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘नोटबंदी पर आरबीआई का आज शाम का खुलासा क्या बड़े घोटाले की ओर संकेत नहीं करता?’

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने नोटबंदी को लेकर केंद्र पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि भारत इस ‘राष्ट्रविरोधी कदम’ के लिए मोदी सरकार को कभी माफ नहीं कर सकता. इसने कथित तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया.

सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर एक संसदीय समिति को भ्रामक जानकारी देने के लिए आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी.

बुधवार को आरबीआई की 2016-17 की सालाना रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि एक हजार रुपये के 1.4 प्रतिशत नोटों को छोड़कर बाकी बैंकिंग प्रणाली में लौट आए हैं.

चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा, ’99 फीसदी नोट कानूनी रूप से बदले गए. क्या नोटबंदी कालेधन को सफेद करने के लिए तैयार की गई योजना थी?’ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नोटबंदी के कदम के पीछे जो अर्थशास्त्री था वह ‘नोबल पुरस्कार का हकदार’ है, क्योंकि आरबीआई के पास 16,000 करोड़ रुपये आए, लेकिन नए नोटों की छपाई में 21,000 करोड़ रुपये खर्च हो गए.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि नोटबंदी के एक भी उद्देश्य की पूर्ति नहीं हुई.