फूलों की घाटी को लगी ‘गोल्डन फर्न की बुरी नजर’

जोशीमठ, विश्वधरोहर स्थल फूलों की घाटी नेशनल पार्क में पालीगोनियम के बाद अब एक और मुसीबत पैर पसारने लगी है,अब घाटी में गोल्डन फर्न नें अपनी दस्तक दी है,घाटी में यह फर्न बामण धौड से जान मार्गेट लेगी की कब्र तक फैल चुका है.

बड़ी बात ये कि घाटी में जिन कम्पार्टमेंटों में इनदिनों खूबसूरत पुष्पों की विभिन्न बहुरंगी प्रजातियां पर्यटकों को आकर्षित करती थी वहां ये गोल्डन फर्न फैल गया है, सबसे अधिक यह फर्न जान मार्गेट लेगी उर्फ मेरी जो एडिनवरा बोटनीकल गार्डन इंगलैंड से वर्ष 1938-39 के दौरान वैली रिसर्च के लिये आयी थी और फिर यहीं सदा के लिये पुष्प वाटिकाओं के बीच चिर निन्द्रा में सो गयी थी.

उनकी कब्र के चारो और फैले फूलों की क्यारियों को प्रभावित कर रही है, पहले की तरह अब यहां रंग बिरंगे फूल कम दिख रहे है और पूरा ईलाका गोल्डन फर्न के आगोश में समाया हुआ है जिसके चलते यहां मेरी की कब्र तक आने वाले हजारों देशी विदेशी प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को मायूसी हाथ लग रही है, बावजूद इसके पार्क के अधिकारी इसे सीमित दायरे में ही फैला बताते हुये अब इसके उन्मूलन के लिये सर्वे के बाद प्रस्ताव तैयार करनें की बात कह रहे है,नन्दा देवी नेशनल पार्क जहां पोलिगोनियम पर लाखो रुपये प्रतिवर्ष खर्च कर रहा है वही अब ये फर्न नयी आफत बनकर आ गयी है,दरअसल यह गोल्डन फर्न का पौधा करीब आधा मीटर लम्बा और इसके पत्ते चौडे और पीले भुरे गोल्डन कलर के होते जहां यह फर्न उगता वहां कोई पुष्प प्रजाति नही खिल सकती है.