सुरक्षा और रक्षा संबंध बढ़ाएंगे भारत-नेपाल, इन समझौतों पर हुए दस्तखत

नेपाल ने गुरुवार को भारत को आश्वस्त किया कि वह भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं देगा. इस बीच, दोनों पक्षों ने मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने और नेपाल में भूकंप के बाद पुनर्निर्माण में सहयोग समेत आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए.

अपने नेपाली समकक्ष शेर बहादुर देउबा के साथ व्यापक बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के सुरक्षा और रक्षा बलों के बीच करीबी समन्वय पर जोर दिया, ताकि भारत और नेपाल की खुली सीमा का दुरुपयोग रोका जा सके.

पीएम मोदी ने वार्ता के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘सुरक्षा क्षेत्र में रक्षा संबंध और सहायता हमारी भागीदारी का महत्वपूर्ण पहलू है. हमारे रक्षा हित भी एक-दूसरे पर निर्भर और आश्रित हैं.’ देउबा ने ‘सभी तरह के समर्थन, मदद और सहयोग’ का आश्वासन दिया.

नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जैसा आपने (मोदी ने) उल्लेख किया कि नेपाल की खुली सीमा है, मैं आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि नेपाल कभी भी मित्रवत पड़ोसी भारत के खिलाफ किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं देगा और हमारी तरफ से हर तरह का समर्थन, सभी तरह की मदद और सहयोग रहेगा.’

बाद में, दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात पर पत्रकारों को जानकारी देते हुए विदेश सचिव एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने नेपाल को बताया कि वह अपने नए संविधान को लागू करने में हर तबके के लोगों को साथ लेकर चले और ‘जितना संभव हो सके, उतना संभव व्यापक सहमति’ बनाए.

यह पूछे जाने पर कि क्या दोनों देशों के नेताओं के बीच बुधवार और गुरुवार को हुई मुलाकात में डोकलाम गतिरोध पर चर्चा हुई, इस पर विदेश सचिव ने ‘नहीं’ कहकर जवाब दिया.

अपने देश में संविधान को लागू करने में कुछ ‘मसले’ होने की बात स्वीकार करते हुए देउबा ने विश्वास जताया कि सभी हिस्सों और जातीयता वाले लोगों की राय को शामिल करने वाला संविधान हकीकत बनेगा.

मोदी ने भी विश्वास जताया कि नेपाल संविधान को लागू करने के दौरान अपने सभी नागरिकों की आकांक्षाओं पर विचार करेगा.

गत 21 अगस्त को नेपाली संसद मधेसियों के मुद्दों का निवारण करने के लिए बहुप्रतीक्षित संविधान संशोधन विधेयक का अनुमोदन करने में विफल रहा, क्योंकि सत्तारूढ़ गठबंधन इस विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका.

देउबा ने कहा कि दोनों पक्षों ने बिम्सटेक (दि बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक को-ऑपरेशन) और बीबीआईएन (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल पहल) का इस्तेमाल करके क्षेत्रीय और उपक्षेत्रीय सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर लाभदायक स्थिति पैदा करने पर विचारों का आदान-प्रदान भी किया.

नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्वोच्च राजनैतिक स्तर पर नियमित संवाद दोनों देशों के बीच विश्वास को कायम रखने और उसे मजबूत बनाने में काफी योगदान करेगा और उनकी मौजूदा यात्रा इस दिशा में एक प्रयास है.

दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से कटैया-कुसहा और रक्सौल-परवानीपुर सीमा पार बिजली पारेषण लाइनों का उद्घाटन किया. मोदी ने कहा कि यह नेपाल को मौजूदा 350 मेगावाट के अलावा अतिरिक्त 100 मेगावाट बिजली प्रदान करेगा.

दोनों पक्षों ने बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए रामायण और बौद्ध सर्किट के विकास पर भी सहमति जताई. बाढ़ प्रबंधन और सिंचाई परियोजनाएं भी दोनों देशों के बीच बातचीत के केंद्र में थीं.

पीएम मोदी ने भारत और नेपाल की एजेंसियों के बीच बाढ़ प्रबंधन पर महती समन्वय और सलाह-मशविरे पर भी जोर दिया और कहा कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे के हितों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक समाधान की दिशा में अवश्य काम करना चाहिए. जहां उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत की तरफ से उत्तराखंड सीमा पर पंचेश्वर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा. वहीं देउबा ने जोर दिया कि यह बाढ़ नियंत्रण और फसल सिंचाई में मदद करेगा.

मोदी ने कहा कि देउबा ने उन्हें सूचित किया कि अरूण III सिंचाई परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के मुद्दे का निवारण कर दिया गया है और नेपाली प्रधानमंत्री ने उन्हें भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया.

देउबा ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी की ‘पड़ोस पहले’ और ‘सबका साथ सबका विकास’ नीति की सराहना करते हैं.