उत्तराखंड पुलिस में 11 फीसदी महिलाएं, देश में टॉप 5 में पहुंचा राज्य

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को कहा कि उत्तराखंड पुलिस बल में 11 प्रतिशत से ज्यादा महिलाओं के साथ राज्य देश के पांच शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है.

यहां पुलिस लाइन्स में राज्य पुलिस के ट्रेनी आरक्षियों (कांस्टेबल्स) के पासिंग आउट परेड की सलामी लेने के बाद दिए अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस में महिलाओं की संख्या 11 प्रतिशत से ज्यादा है जो सात प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से अधिक है.

रावत ने कहा, ‘पुलिस बल में महिलाओं की इतनी भागीदारी से उत्तराखंड देश के शीर्ष पांच राज्यों में सम्मिलित हो गया है. इसका मतलब यह हुआ कि अब राज्य के हर थाने में एक या उससे ज्यादा महिला पुलिस की तैनाती हो सकेगी.’

पुलिस में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे महिला संबंधी अपराध की रोकथाम और उसके कुशल निवारण में भी मदद मिलेगी.

रावत ने कहा, ‘जब मैं अपनी बेटियों को इस वर्दी में देख रहा हूं तो मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है. आज मैं कह सकता हूं कि उत्तराखंड राज्य में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान खूब फल फूल रहा है. आप सारी बेटियां इस राज्य का गौरव हैं.’

उन्होंने उम्मीद जतायी कि महिलाएं पूरी ईमानदारी और लगन से पुलिस महकमे में अपनी अलग पहचान बनाएंगी. मुख्यमंत्री ने आधुनिक समय में पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि आज पुलिस का काम पारम्परिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर भ्रष्टाचार और नशे के कारोबार को रोकने जैसे बहुत से अन्य सामाजिक सरकारों से भी जुड गया है और पुलिस पर लोगों का भरोसा भी बढ़ा है.

इस संबंध में उन्होंने कहा कि प्रदेश के राजस्व पुलिस की व्यवस्था वाले क्षेत्रों में भी अब रेगुलर पुलिस की मांग उठने लगी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई स्मार्ट पुलिस की परिकल्पना को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस को भी स्ट्रिक्ट और सेंस्टिव, मारल और मोबाइल, एलर्ट और एकाउंटेबल, रिलाएबल और रिस्पान्सिबल और टेक्नोलाजी सेवी होना पडेगा. पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी ने बताया कि देहरादून में 141 महिला आरक्षियों समेत कुल 175 ट्रेनी आरक्षियों को नौ माह का आधारभूत प्रशिक्षण दिया गया जबकि अन्य जिलों में भी प्रशिक्षण संपन्न हो चुका है.