डोकलाम विवाद: ‘वाटर बम’ के जरिए तबाही फैला सकता है चीन

भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. दोनों देशों की सेनाएं 2 महीने से अधिक वक्त से डोकलाम में डटी हुई हैं. इस बीच चीन ‘वाटर बम’ के जरिए तबाही फैला सकता है. इसका खुलासा सोमवार को  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के एक बयान से जाहिर हुआ. उन्होंने प्रैस कॉन्फ्रैंस दौरान कहा कि इस साल चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी में पानी के स्तर की कोई जानकारी नहीं दी है.

बरसात के मौसम में समय-समय पर पड़ोसी देशों द्वारा एक-दूसरे से नदियों में बढ़ते जलस्तर और बांधों से कितना पानी छोड़ा जा रहा है, इस बारे आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं ताकि अगर बाढ़ जैसे हालात हों तो उससे निपटने की तैयारी की जा सके. उत्तरी भारतीय पहले ही बाढ़ की चपेट में है. बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं. ऐसे में अगर चीन बिना बताए ब्रह्मपुत्र नदी में ज्यादा पानी छोड़ेगा तो इससे इन राज्यों के साथ-साथ दूसरे राज्यों में स्थिति और भयावह हो सकती है.

चीन की भौगोलिक स्थिति देखें तो वह भारत से ऊंचे स्थान पर है. वहीं चीन के पास कई बांध हैं. भारत में ऐसी कई बड़ी नदियां हैं जो चीन से निकलकर भारत में आती हैं जिनमें से ब्रह्मपुत्र नदी सबसे बड़ी है. अगर चीन चाहे तो कुछ दिनों तक पानी बांध पर रोककर छोड़ सकता है जिससे भारत में तबाही का मंजर आ सकता है. सिर्फ ब्रह्मपुत्र नदी ही नहीं बल्कि चीन से सतलुज नदी भी निकलती है. सतलुज नदी चीन के कब्जे वाले तिब्बत से निकलकर हिमाचल प्रदेश और पंजाब में आती है. वहीं तिब्बत से निकलकर सिंधु नदी लद्दाख से होते हुए निकलती है और अरब सागर में मिलती है. साफ है कि चीन के पास 3 ऐसी बड़ी नदियां हैं जो भारत में तबाही का कारण बन सकती हैं.

चीन के साथ डोकलाम विवाद पर भारत के कूटनीतिक प्रयासों का रंग दिखना शुरू हो गया है. इस मसले पर चीन अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में घिरता दिख रहा है. अमरीका के बाद जापान ने भी डोकलाम विवाद पर भारत का समर्थन किया है. इन दोनों देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम भी भारत के साथ हैं. वहीं भारत का समर्थन करने पर चीन ने जापान को फटकार लगाते हुए कहा कि वह चीन-भारत सीमा विवाद पर बिना सोचे-समझे बयानबाजी करने से बाज आए.

यूरोप के कुछ ताकतवर देश जैसे फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन भी चीन के मुद्दे पर भारत के साथ आ सकते हैं. भारत के इन सभी देशों से रिश्ते काफी अच्छे रहे हैं, वहीं कई मुद्दों पर इन देशों ने भारत का साथ दिया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन सभी देशों ने भारत का स्थायी सीट के लिए साथ दिया है, वहीं चीन भारत के खिलाफ रहा है.