उत्तराखंड सीमा पर भी चीन की ‘दादागिरी’, चरवाहों को बाड़ाहोती इलाके से भगाया

उत्तराखंड से लगे चीन सीमा क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिले के चरवाहे समय से पहले ही निचले क्षेत्रों में लौट आए हैं. चरवाहों का कहना है कि विगत 25 जुलाई को बाड़ाहोती में घुसे चीनी सैनिकों ने उन्हें भी अपनी भेड़-बकरियों के साथ लौटने को इशारा किया था.

जोशीमठ के एसडीएम योगेंद्र सिंह का कहना है कि इस साल 51 भेड़ पालकों को सीमा क्षेत्र में जाने की अनुमति दी गई थी. सीमा पर तनाव के चलते एक माह पहले ही चरवाहे बाड़ाहोती से लौटने लगे हैं.

मालूम हो कि हर वर्ष ग्रीष्मकाल में जिले के चरवाहे अपनी भेड़-बकरियों को सीमा क्षेत्र के बुग्यालों में चुगान के लिए ले जाते हैं और ठंड होने पर सितंबर माह में अपनी भेड़-बकरियों को निचले क्षेत्रों में ले आते हैं. इस वर्ष भारत और चीन के बीच सिक्किम सेक्टर के डोकलम में सैन्य तनाव के चलते उत्तराखंड से लगी चीन सीमा पर भी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है.

चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र के भेड़ पालक कई वर्षों से अपनी भेड़-बकरियों को लेकर बाड़ाहोती क्षेत्र में जाते हैं. बाड़ाहोती से लौटे कुछ भेड़पालकों ने बताया कि पिछले दिनों बाड़ाहोती क्षेत्र में पहुंचे चीनी सैनिकों ने उन्हें बकरियों को होतीगाड़ से ही वापस ले जाने के लिए इशारा किया था. अब सीमा क्षेत्र में तनाव को देखते हुए आईटीबीपी के जवानों ने उन्हें निचले क्षेत्रों में चले जाने को कहा है. इसी के चलते अगस्त माह में ही उन्हें लौटना पड़ा है.

चमोली जिले के सीमा क्षेत्र बाड़ाहोती में चीन की ओर से कई बार घुसपैठ की कोशिश की जाती रही है. विगत 25 जुलाई को करीब 200 चीनी सैनिक बाड़ाहोती में घुस आए थे.

– दो जून 2017 को दो चीनी हेलीकाप्टर बाड़ाहोती क्षेत्र में तीन मिनट तक मंडराते रहे.
– 2014 में बाड़ाहोती क्षेत्र में एक हेलीकाप्टर काफी देर तक मंडराता रहा.
– 2015 में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय चरवाहों के खाद्यान्न को नष्ट कर दिया गया.
– 2016 में सीमा क्षेत्र के निरीक्षण को गई चमोली प्रशासन की टीम का भी चीनी सैनिकों से सामना हुआ था.