केंद्र सरकार ने पहाड़ी राज्यों को दिया ये तोहफा

पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों में उद्योगों को कर छूट के मामले में सरकार ने बड़ी राहत दी है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को  कहा कि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में उद्योगों को दी जा रही कर छूट अब मार्च 2027 तक जारी रहेगी. हालांकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह छूट रिफंड के तौर पर दी जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति में इस प्रस्ताव को आज सैद्घांतिक मंजूरी दी गई. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जेटली ने कहा, ‘औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग इस बारे में जल्द ही दिशानिर्देश जारी करेगा.’ उन्होंने कहा, ‘जीएसटी कानून के प्रारूप के अंतर्गत हरेक उद्योग निश्चित समयावधि (31 मार्च 2027) में अपने खुद की रिफंड व्यवस्था के हकदार होंगे.’

जेटली ने कहा, ‘पूर्वोत्तर और जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के उद्योग पहले की कर व्यवस्था के तहत 10 साल तक कर में छूट का लाभ मिला हुआ था. अब नई कर व्यवस्था के अंतर्गत छूट की जगह उन्हें रिफंड मिलेगा.’ वस्तु एवं सेवा कर के तहत कर छूट का कोई प्रावधान नहीं है लेकिन इस कानून में एक धारा है जिसमें रिफंड की सहूलियत दी गई है.

जेटली ने कहा, ‘ऐसे में डीबीटी के जरिये रिफंड की अनुमति होगी. इस छूट के समाप्त होने का उपबंध बढ़ाकर वर्ष 2027 तक कर दिया गया है.’ इस व्यवस्था से जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम सहित पूर्वोत्तर के राज्यों के 4,284 औद्योगिक प्रतिष्ठान लाभ के हकदार होंगे. इसके लिए 27,413 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों की उच्चस्तरीय समिति गठित की है. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मंत्रिमंडल ने वैकल्पिक तंत्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है. इस समिति में वित्त मंत्री, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री और प्रशासनिक विभाग के मंत्री शामिल हैं. यह समिति रणनीतिक निवेश से संबंधित मामलों पर फैसला करेगी. समिति अभिरुचि पत्र आमंत्रित करने से लेकर वित्तीय बोलियां आमंत्रित करने तक के नियम व शर्तें तय करेगी.