रोडवेजकर्मी अपनी मांगो को लेकर आज रात से जा सकते हैं हड़ताल पर

उत्तराखंड में एकबार फिर से रोडवेज के पहिए थम सकते हैं. करीब तीन हजार रोडवेज कर्मचारियों ने बेमियादी हड़ताल पर जाने की ठान ली है. यह कर्मचारी आउट सोर्स चालक-परिचालक और अन्य कर्मियों को नियमित करने की मांग कर रहे हैं. अगर एसा होता है तो प्रदेशभर में करीब 70 फीसद बसों के पहिये थमने का अंदेशा है. मामले को सुलझाने के लिए रोडवेज प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार संत ने आंदोलनरत कर्मियों के साथ बुधवार शाम को समझौता वार्ता भी बुलाई है मगर कर्मचारी फिलहाल मानने को राजी नही दिख रहे. कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक शासनादेश नहीं हो जाता वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे.

उत्तराखंड  रोडवेज कर्मचारी यूनियन के बैनर तले प्रस्तावित हड़ताल और बसों के चक्काजाम को टालने के लिए आज सुबह से ही रोडवेज मुख्यालय से सचिवालय तक मंथन चल रहा है. परिवहन सचिव डी. सैंथिल पांडियन ने आउट सोर्स कर्मचारियों के विनियमितीकरण के फार्मूले पर अधिकारियों के साथ चर्चा भी की, लेकिन बात नहीं बनी. यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि यह मामला विभाग से निकलकर राजनीतिक दायरे में पहुंच चुका है. लिहाजा, अब सरकार को फैसला लेना पड़ेगा.

आपको बता दें कि उत्तराखंड  रोडवेज कर्मचारी यूनियन से जुड़े करीब तीन हजार नियमित और आउट सोर्स के चालक, परिचालक और तकनीकी कर्मियों के हड़ताल पर जाने का सबसे ज्यादा असर देहरादून के डीलक्स और ग्रामीण डिपो, ऋषिकेश, रुड़की, रानीखेत, भवाली, अल्मोड़ा, रुद्रपुर, लोहाघाट समेत काठगोदाम और हल्द्वानी डिपो पर पड़ने का अंदेशा है. इसके साथ ही दून, हरिद्वार और हल्द्वानी में जेएनएनयूआरएम की सभी बसें ठप पड़ सकती हैं. कर्मियों में बड़ी संख्या ऐसी भी हैं जो आउट सोर्स में 14 से 15 साल से सेवाएं दे रहें हैं मगर नियमित नहीं हुए.