भारत छोड़ो आंदोलन की 75वी सालगिरह, पीएम का नारा “करेंगे और करके रहेंगे”

बुधवार को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के 75 वर्ष पूरे होने पर संसद में विशेष सत्र हुआ. संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना संबोधन दिया. पीएम ने गांधी के आदर्शों को याद करते हुए जनता से अपील की कि भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर वे सांप्रदायिकता, जातिवाद, भ्रष्टाचार से देश को मुक्त कराने का संकल्प लें. पीएम ने कहा कि युवाओं के लिए जरूरी है कि वह भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक क्षणों के बारे में जानें.

यह भारत के लिए गौरवान्वित दिन है. इस बात के साथ मोदी ने संबोधन की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि ये खास पल है. हम भारत छोड़ो आंदोलन को याद कर रहे हैं. ऐसे पलों को याद करने से हमें एक मजबूती मिलती है. मोदी ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन ने देश में नए नेतृत्व का उदय किया. सभी ने आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी का समर्थन किया. हमारी आजादी सिर्फ भारत के लिए नहीं थी, बल्कि यह विश्व के दूसरे हिस्सों में उपनिवेशवाद के खात्मे में एक निर्णायक क्षण था.

प्रधानमंत्री ने सदन में कहा कि अंग्रेजों ने भी ऐसे आंदोलन की कल्पना नहीं की थी. 1942 में अभी नहीं तो कभी नहीं का माहौल था. आज हमारे पास गांधी का नेतृत्व नहीं लेकिन सवा सौ करोड़ लोगों के विश्वास के साथ यहां पहुंचे लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं. उन्होंने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन के समय बापू बोले थे- ‘पूर्णं स्वतंत्रता से कम मंजूर नहीं’. उन्होंने कहा था कि ‘करेंगे या मरेंगे’ और आज वही नारा ‘करेंगे और करके रहेंगे’ के रूप में है. महात्‍मा गांधी ने आजादी के आंदोलन को ऊंचाई पर ले जाने का प्रयास किया. इतिहास की याद जीवन को नई ताकत देता है.