अब चीन की हेकड़ी सहे बिना, भारत से होंगे कैलाश पर्वत के दर्शन; चीनी वीजा की भी जरूरत नहीं

भारत से पव‌ित्र कैलाश यात्रा के ल‌िए जाने वाले तीर्थयात्रियों को अब चीन की हेकड़ी का सामना नहीं करना पड़ेगा. तीर्थयात्री अब यहां से भी कैलाश पर्वत के दर्शन कर सकेंगे.

बता दें क‌ि, प‌िथौरागढ़ के लोक न‌िर्माण व‌‌िभाग की टीम ने कैलाश मानसरोवर जाने के ल‌िए साढे पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर एक बायपास तैयार क‌िया है. य‌ह बायपास ल‌िपुलेख के न‌िकट तैयार क‌िया गया है.

इस बायपास के मार्ग के दो क‌िलो मीटर तक चलने के बाद एक ऐसा व्यू प्वाइंट बनाया गया है, जहां से पव‌ित्र कैलाश के दर्शन आसानी से क‌िए जा सकते हैं. भव‌िष्य मे यह बायपास उन पर्यटकों के ल‌िए डेस्टीनेशन प्वाइंट बन सकेगा जो वीजा या अन्य कारणों से चीनी क्षेत्र में नहीं जा पाते हैं.

इस व्यू प्वाइंट से कैलाश की दूरी तकरीबन 160 क‌िलोमीटर है. ऐसे में हालांक‌ि तीर्थयात्री पास से कैलाश पर्वत के दर्शन नहीं कर पाएंगे, लेक‌िन यह ऐसा व्यू प्वाइंट है जहां से पूरा कैलाश पर्वत द‌िखता है. इसल‌िए तीर्थयात्री यहीं से भगवान श‌िव की पूजा कर सकते हैं.

प‌िथौगराढ़ में पीडब्ल्यूडी अस्कोट के जूनियर इंजीनियर एबी कांडपाल के मुताब‌िक, वायपास से इसकी दूरी दो क‌िमी होगी. अब आद‌ि कैलाश यात्री भी इसी मार्ग से पर्वत जा सकेंगे.

बता दें क‌ि चीन ने तिब्बत के धार्मिक स्थलों को भी अपने कब्जे में ले लिया है. ल्हासा से कैलाश मानसरोवर तक की यात्रा के दौरान 40 से अधिक बार चेकिंग कर चीन के सुरक्षाकर्मी यात्रियों को परेशान करते हैं.

गौरतलब है क‌ि मानसरोवर यात्रा सबसे कठ‌िन तीर्थयात्राओं में से एक है. यहां प‌िथौरागढ ज‌िले की भारत त‌िब्बत सीमा से होते हुए देशभर के हजारों की संख्या में यात्री जाते हैं.