एसआईटी जांच में उधड़ रहीं एनएच 74 घोटाले की परतें

एनएच 74 के जमीन अधिग्रहण में हुए तीन सौ करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के लिए सीबीआई की स्वीकृति मिलने की बात को एक माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन सरकार सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी नहीं कर पाई. अधिसूचना को लेकर हो रही देरी सरकार की जीरो टारलेंस नीति पर सवाल उठा रही है. हालांकि एसआईटी घोटाले की जांच कर रही है तो घोटाले की परतें उधड़ कर सामने आ रही हैं.एनएच 74 के भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों ने बैक डेट में एनएच की हद में आ रही जमीनों को कृषि भूमि से अकृषि में दर्ज करा लिया. इस तरह किसानों ने दस गुना अधिक तक मुआवजा लिया. इसमें अफसरों के साथ ही कुछ सफेदपोश भी शामिल रहे हैं.

विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने इस घोटाले को उजागर किया था. सरकार गठन के बाद मुख्यमंत्री ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का ऐलान किया था. इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक पत्र के बाद सरकार की खासी फजीहत हुई. बाद में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का संकल्प दोहराया था. मुख्यमंत्री ने जून में यह बात सार्वजनिक की कि सीबीआई ने घोटाले की जांच को स्वीकृति दे दी है. एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अभी तक सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है. आखिर क्या वजह है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जांच सीबीआई के हवाले नहीं हो पा रही है. सरकार की जीरो टारलेंस नीति पर सवाल उठ रहे हैं.

उधर, एसआईटी की जांच जारी है. सूत्रों की मानें तो एसआईटी ने ऐसे 19 खाते चिह्नित किए हैं जिनमें मुआवजे की रकम आने के बाद तत्काल धनराशि दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई है. एक डाटा एंट्री आपरेशन और उसके पिता के खाते में एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. इन दोनों से एसआईटी ने पूछताछ की, मगर वह खाते में एक करोड़ आने का कोई संतोष जनक जवाब नहीं दे पाए. पुलिस ऐसे ही अन्य मामलों की जांच भी कर रही है. अब यह तो साफ हो चुका है कि मुआवजे की रकम की बंदरबांट हुई है.