संसद ने शिक्षा का अधिकार विधेयक में संशोधन किया

नई दिल्ली, राज्यसभा ने मंगलवार को बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2017 पारित कर दिया, जिसके साथ ही शिक्षकों को नियुक्ति के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने के लिए चार साल का वक्त मिल गया है. यह विधेयक बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 में संशोधन करता है. नए अधिनियम के तहत, 31 मार्च, 2015 तक न्यूनतम पात्रता नहीं रखने वाले शिक्षकों को 31 मार्च, 2019 तक न्यूनतम योग्यता प्राप्त करना होगा.

राज्यसभा में विधेयक पर तीन घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सीखने का परिणाम अहम है और उसे पारिभाषित किया गया है.उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हैंडबुक प्रदान किया गया है तथा अभिभावकों को पुस्तिकाएं प्रदान की जाएंगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि किसी खास कक्षा के किसी छात्र को क्या जानना चाहिए.

उन्होंने कहा, “इस बात पर चिंता जताई गई है कि दो वर्षो के भीतर 11 लाख शिक्षकों को कैसे प्रशिक्षित किया जाएगा? उन्हें ऑनलाइन तथा ऑफलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा.”एक अप्रैल, 2010 को प्रभाव में आए बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009 के मुताबिक, न्यूनतम योग्यता न रखने वाले शिक्षकों को इस योग्यता को पांच वर्षो में प्राप्त करने की जरूरत है.

इस अधिनियम को छह से 14 वर्ष के सभी बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए लाया गया था.