विपक्ष ने राज्यसभा में संशोधन प्रस्ताव पारित करवाया, मोदी सरकार की बढ़ी मुसीबत

नई दिल्ली, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का मामला फिर अटक गया है.सोमवार को कई मंत्रियों की गैरहाजिरी के कारण विपक्ष राज्यसभा में संशोधन प्रस्ताव पारित करवाने में कामयाब हो गया.

विपक्षी दलों की राह इसलिए आसान हो गई क्योंकि बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई सांसद सदन में मौजूद नहीं थे. आपको बता दें की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अपने सांसदों को सदन में उपस्थित नहीं रहने को लेकर नसीहत दे चुके हैं.

दरअसल सामाजिक अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने पिछड़ा वर्ग आयोग संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में पेश किया.जिसपर लगभग चार घंटे बहस चली.जिसके बाद कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह, बीके हरिप्रसाद और हुसैन दलवई ने प्रस्तावित आयोग की सदस्य संख्या तीन से बढ़ाकर पांच करने का प्रस्ताव रखा.

तीनों सांसदों ने पांच सदस्यों में एक महिला सदस्य और एक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य को शामिल करने का प्रावधान विधेयक में शामिल करने के संशोधन पेश किये.इसके अलावा संशोधन में यह भी मांग की गई थी कि आयोग के सभी सदस्य पिछड़े वर्ग के ही हों.सरकार इसके पक्ष में नहीं थी.

इस बीच दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन से इस पर मतविभाजन की मांग की.जिसे सभापति ने मंजूर कर लिया.मतविभाजन के दौरान विपक्ष के संशोधन के पक्ष में 75 वोट पड़े जबकि इसके खिलाफ सिर्फ 54 वोट मिले.जिससे सरकार का बड़ी फजीहत हुई.

राज्यसभा से पारित संशोधन विधेयक को अब लोकसभा भेजा जाएगा.जहां सरकार विपक्ष के संशोधन का विरोध कर सकती है.