केदारनाथ आपदा ने 4 साल बाद ली एक और जान, कब टूटेगी प्रशासन नींद

रुद्रप्रयाग जिले के फाटा से ट्रॉली के सहारे एक युवती अपने गांव रेल जा रही थी, इस बीच युवती का संतुलन बिगड़ गया और वो उफनाती मंदाकिनी नदी में जा गिरी. हादसे के बाद मौके पर पहुंची एनडीआरएफ और पुलिस प्रशासन की टीम ने सर्च अभियान चलाया, लेकिन देर शाम तक युवती का कुछ पता नहीं चल पाया.

जिले के ऊखीमठ ब्लॉक के अंतर्गत फाटा कस्बे से रेशमा (21 वर्ष) पुत्री बृजमोहन अपने गांव रेल जा रही थी. हादसा सोमवार दोपहर डेढ़ बजे के करीब गांव से 200 मीटर पहले हुआ. जब रेशमा मंदाकिनी नदी पर लगी ट्रॉली से सीधे नीचे गिर गई. हादसे के वक्त उसकी दो सहेलियां भी ट्रॉली में उसके साथ बैठी हुर्इ थी.

हादसा होते ही ट्रॉली में बैठी अन्य दो युवतियों ने अपने परिजनों को इसकी सूचना दी. जिसके बाद ग्रामीण युवती को खोजने में जुट गए, साथ ही पुलिस प्रशासन को भी इस घटना की सूचना दी गई. सूचना मिलने पर एसडीएम गोपाल सिंह चौहान, पुलिस, एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और युवती की खोजबीन में जुट गए. वहीं हादसे के बाद से ही युवती के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. आपको बता दें कि नवंबर महीने में युवती की शादी होनी थी.

गौरतलब है कि साल 2013 की केदारनाथ आपदा में यहां पर बना पैदल पुल बह गया था, जिसके बाद से अब तक चार साल बीत जाने के बाद भी पुल नहीं बना है. रेल गांव के 29 परिवार रोजाना इसी ट्रॉली से इन दिनों आवाजाही कर रहे हैं. ट्रॉली की स्थिति भी काफी खराब है. ग्रामीण मोटर से चलने वाली ट्रॉली के खराब होने के कारण लंबे समय से उसे ठीक कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अबतक इसे ठीक नहीं किया जा सका है.

रेशमा के जिंदा होने की उम्मीद अब न के बराबर है. ऐसे में कहा जा सकता है कि उसकी जान भी केदारनाथ आपदा ने ही ली है. लेकिन इसमें प्रशासन की नींद न टूटना ज्यादा गुनहगार है. क्या अब प्रशासन जागेगा और आपदा में बहे पुल की जगह नया पुल बनाएगा.