2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को कोई चुनौती नहीं : नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद पर जबर्दस्त हमला बोलते हुए इस बात पर जोर दिया कि महागठबंधन में बने रहने का मतलब ‘भ्रष्टाचार से समझौता’ करने के बराबर होता.

चार वर्ष के अंतराल के बाद दोबारा एनडीए का दामन थामने वाले नीतीश कुमार ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘कोई चुनौती’ नहीं होगी.

उन्होंने यह भी कहा कि फिर से साथ आने का प्रस्ताव बीजेपी में ‘उच्चतम स्तर’ से आया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया, क्योंकि उनके तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते महागठबंधन के साथ ‘आगे बढ़ना असंभव’ हो गया था.

उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘भ्रष्टाचार के आरोप थे और (लालू प्रसाद और परिवार के खिलाफ’ सीबीआई ने मामले दर्ज किये गए थे. मैंने उनसे केवल यही कहा था कि उचित जवाब के साथ सामने आएं. ऐसा करने की बजाय उन्होंने यह कहते हुए मेरा मजाक उड़ाया कि क्या मैं कोई सीबीआई या पुलिस का अधिकारी हूं.’

नीतीश कुमार ने कहा, ‘लालूजी ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया. भ्रष्टाचार पर बिल्कुल भी बर्दास्त नहीं करने की बात करने के बाद मैं चुप कैसे रह सकता था? अब मुझे लगता है कि उनके पास कोई उचित जवाब नहीं था.’

नीतीश कुमार को हाल तक मोदी को संभावित चुनौती देने वाले के तौर पर देखा जाता था. कुमार ने कहा, ‘(मोदी के अलावा) कोई और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठ सकता. अब किसी में भी मोदी को हराने की ताकत नहीं है.’ राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भविष्य की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर जेडीयू प्रमुख कुमार ने कहा, ‘हमारी एक छोटी सी पार्टी है, जो बड़े राष्ट्रीय आकांक्षाएं नहीं पालती.’ जेडीयू के मोदी सरकार में मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए का हिस्सा बनने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पटना में 19 अगस्त को बैठक होगी जिसमें ऐसे सभी मुद्दों पर निर्णय किया जाएगा.

उन्होंने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा जिन्होंने ‘साम्प्रदायिक’ बीजेपी के साथ गठबंधन बनाने के लिए उनकी आलोचना की थी. उन्होंने लालू के धर्मनिरपेक्ष साख पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘धर्मनिरपेक्षता की आड़ में छुपकर भारी पैसा बनाना…क्या यह धर्मनिरपेक्षता है?…मुझे किसी से धर्मनिरपेक्षता का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए.’ कुमार ने एक धर्मनिरपेक्ष गठबंधन तोड़ने को लेकर हो रही उनकी आलोचना के परिप्रेक्ष्य में अपना बचाव किया. उन्होंने सवाल किया, ‘धर्मनिरपेक्षता का क्या मतलब है? क्या धर्मनिरपेक्षता का मतलब हजारों करोड़ों रुपये की सम्पत्ति बनाना है?’

इस बीच पटना हाईकोर्ट ने नीतीश कुमार द्वारा नई सरकार गठन को चुनौती देने वाली दो जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि राज्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण के बाद अदालत के हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है. एक जनहित याचिका जहां आरजेडी विधायकों सरोज यादव और चंदन वर्मा की ओर से जबकि दूसरी समाजवादी पार्टी सदस्य जितेंद्र कुमार की ओर से दायर की गई थी.

कुमार ने गत शुक्रवार को विश्वासमत आसानी से हासिल कर लिया था. उनके समर्थन में 131 वोट जबकि विरोध में 108 वोट पड़े थे. नीतीश ने जहां बीजेपी के साथ जाने के अपने निर्णय का बचाव किया वहीं जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने अपनी असहमति जतायी और कहा कि 2015 के विधानसभा चुनाव का जनादेश महागठबंधन के लिए था. उन्होंने घटनाक्रम को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया.

यादव ने संसद के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘स्थिति हमारे लिए अरूचिकर है…यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गठबंधन टूट गया है. जनता का जनादेश इसके लिए नहीं था. बिहार के 11 करोड़ लोगों ने हमारे गठबंधन का अनुमोदन किया था.’ नीतीश कुमार द्वारा तीन पार्टियों वाले महागठबंधन से अलग होने और एनडीए का दामन थाम लेने के बाद राज्यसभा सदस्य शरद यादव ने विपक्ष के कई नेताओं से मुलाकात की है, जिसमें कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं.

वहीं नीतीश कुमार ने शरद यादव के विचारों को कमतर करने का प्रयास करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार होते हैं और पार्टी नेताओं को जेडीयू की पटना में 19 अगस्त को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अपने विचारों को सामने रखने का मौका मिलेगा.

नीतीश कुमार ने पटना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी की बिहार इकाई ने आरजेडी से संबंध तोड़ने और बीजेपी से हाथ मिलाने के निर्णय का अनुमोदन किया है. उधर, लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इन आरोपों के खारिज किया कि उनकी पार्टी की प्रतिद्वंद्वी पार्टियों में टूट और दलबदल में कोई भूमिका है.

शाह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘बिहार में हमने किसी पार्टी को नहीं तोड़ा. नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा दिया क्योंकि उन्होंने निर्णय किया था कि वह भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं करेंगे. क्या हम उनकी कनपटी पर बंदूक रखकर कहते कि उस गठबंधन में बने रहें?’