ओलंपिक में शामिल हो सकता है क्रिकेट

खेलों के महाकुंभ ओलंपिक में अगर क्रिकेट को जगह मिल जाए तो भारत का एक पदक तो पक्का होगा. लेकिन नहीं, खुद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऐसा नहीं चाहती. सबसे पहले साल 1900 में पेरिस ओलंपिक में क्रिकेट मुकाबला खेला गया था. लेकिन उसके बाद क्रिकेट खेलों के सबसे बड़े मेले से बाहर हो गया. तब से सौ से भी ज्यादा साल हो गए लेकिन क्रिकेट को ओलिंपक में जगह नहीं मिल पाई. लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) चाहता है कि 2024 ओलंपिक में क्रिकेट को भी जगह मिले.

आईसीसी क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट टी 20 के सहारे ओलंपिक में क्रिकेट की उपस्थिति एक बार फिर दर्ज कराना चाहती है. ऐसी संभावना है कि 2024 का ओलंपिक की मेजबानी एक बार फिर पेरिस को ही मिलेगी. इस बात की घोषणा 13 सितंबर को हो सकती है. फ्रांस ओलंपिक संघ भी चाहता है कि अगर उसे मेजबानी मिलती है तो क्रिकेट इस बार भी इस खेल में शामिल हो.

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने आईसीसी से साफ शब्दों में कह दिया है कि वो इस बात को सुनिश्चित करें कि विश्व की बड़ी टीमें ओलंपिक में खेलने को राजी होगी तभी इस पर विचार किया जाएगा. भारत इस वक्त क्रिकेट का सबसे बड़ा केन्द्र है और बिना बीसीसीआई को मनाए क्रिकेट ओलंपिक में शामिल नहीं हो पाएगी. आईसीसी ने अपनी तरफ से कवायद तेज कर दी है लेकिन उसके लिए सबसे बड़ी रुकावट खुद भारतीय क्रिकेट बोर्ड बन गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक बीसीसीआई के एक बड़े अधिकारी ने कहा कि बोर्ड का हर सदस्य ओलंपिक में क्रिकेट के विचार से सहमत नहीं है.

बीसीसीआई क्यों कर रहा है विरोध

खबरों की मानें तो बीसीसीआई के विरोध करने का एक ही कारण है और वो है बीसीसीआई की स्थिति. बीसीसीआई एक गैर सरकारी संस्थान है. गैर सरकारी होते हुए भी उसे भारत का क्रिकेट बोर्ड माना जाता है और हर किसी ने इसे मान्यता दी है. लेकिन बीसीसीआई नहीं चाहता कि वो अपने स्वामित्व को खोए. बीसीसीआई को डर है कि क्रिकेट के ओलंपिक में शामिल होते ही बीसीसीआई भारतीय ओलंपिक संघ के अंतर्गत आ जाएगा. जिससे उसके स्वामित्व पर खतरा मंडराने लगेगा.

ओलंपिक में क्रिकेट के शामिल होने के लिए समय काफी कम बचा है और उससे भी कम समय बीसीसीआई के अधिकारियों के पास बचा है उन्हें जल्द ही क्रिकेट के ओलंपिक में शामिल होने को लेकर बड़ा फैसला लेना होगा.