उत्तराखंड सरकार और पतंजलि पांच क्षेत्रों में ‘सहयोग’ से काम करेंगे

उत्तराखंड सरकार और पतंजलि के मध्य ‘सहयोग’ कार्यक्रम के तहत बुधवार को राज्य में जैविक कृषि और जड़ी-बूटी तथा पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे पांच क्षेत्रों में मिलकर साथ करने पर सहमति बनी.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और स्वामी रामदेव की उपस्थिति में ‘सहयोग’ कार्यक्रम पर विस्तृत विचार विमर्श के दौरान यह तय किया गया कि उत्तराखंड को जैविक कृषि एवं जड़ी-बूटी राज्य बनाना, राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना, राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना, एक विशाल गौधाम (गौशाला) की स्थापना करना और पर्यटन को बढ़ावा देना जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया जाएगा.

इन सभी क्षेत्रों को राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से ‘गेम चेंजर’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सारे क्षेत्रों में सम्भावनाओं पर अभी तक काफी विचार-विमर्श हुआ है, लेकिन अब इसमें कुछ करके दिखाने की जरूरत है.

इस संबंध में उन्होंने साफ किया कि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए सरकार कड़े और साहसिक फैसले लेने से भी नही हिचकेगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक माह के अन्दर सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए और कहा कि आज से ठीक एक माह बाद उनकी समीक्षा की जाएगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ठोस कार्ययोजना के आधार पर राज्य सरकार और पतंजलि के बीच आवश्यक समझौते भी किए जाएंगे. त्रिवेंद्र ने कहा कि जड़ी-बूटी, औद्यानिकी, योग, आयुर्वेद और पर्यटन से राज्य के लोगों की आमदनी बढ़ाने पर कार्य किया जाएगा, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हों और पलायन रुके.

स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखंड के किसानों को उनके उत्पादों के लिए प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि हाल ही में आर्गेनिक स्टेट का दर्जा पाने वाले सिक्किम जैसे राज्य से कही अधिक भूभाग पर उत्तराखंड में आर्गेनिक खेती हो रही है.

रामदेव ने कहा कि पतंजलि राज्य के उत्पादों के लिए ‘बाईबैक सिस्टम’ बना रहा है. मुख्यमंत्री रावत के ‘तेरह ​जिले, तेरह पर्यटन स्थल’ बनाने के लक्ष्य की सराहना करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि सभी नए पर्यटन स्थलों पर पतंजलि आयुष ग्राम की स्थापना में सहयोग देने को तैयार है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गौशाला की स्थापना करने की योजना है जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जाएगी.

पतंजलि योगपीठ के प्रमुख आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जाएगा. उन्होंने कहा कि पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ी बूटी और पौधे का सर्वेक्षण कर उनका डाक्यूमेंटेशन कर सकते है. राज्य में होने वाले पांच हजार कुंतल ऊन को पतंजलि द्वारा खरीदने पर भी सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की गई. उन्होंने गोपेश्वर में स्थित जड़ी बूटी शोध संस्थान द्वारा उत्पादित किए जाने वाली सभी जड़ी-बूटियों को खरीदने की सहमति भी दी.