विदाई समारोह में भावुक हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

25 जुलाई को भारत के राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त हो रहे प्रणब मुखर्जी ने रविवार को संसद भवन में आयोजित विदाई समारोह में संसद सदस्य के तौर पर अपने पहले दिन को याद करते हुए भावुक हो गए. संसद भवन के केंद्रीय सभागार में दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, ‘आप सबके प्रति आभार और दिल में प्रार्थना का भाव लिए मैं आप सबसे विदाई ले रहा हूं. मैं संतृप्ति का भाव लिए और इस संस्थान के जरिए इस महान देश के एक विनम्र सेवक के रूप में सेवा करने की दिल में खुशी लिए जा रहा हूं.’

मुखर्जी ने कहा, ‘चूंकि मैं इस गणराज्य के राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त हो रहा हूं, मेरा इस संसद के साथ संबंध भी समाप्त हो रहा है. अब मैं भारतीय संसद का हिस्सा नहीं रहूंगा. यह थोड़ा दुखद और स्मृतियों की बरसात जैसा होगा, जब कल मैं इस शानदार इमारत को विदा कहूंगा.’

संसद से अपने जुड़ाव के दिनों को याद करते हुए मुखर्जी ने कहा, ‘जब मैंने पहली बार इस पवित्र संस्थान के प्रवेश द्वार से पहली बार प्रवेश किया, तब मेरी उम्र 34 साल थी.’

मुखर्जी ने कहा, ‘1969 में मैं राज्यसभा सदस्य के तौर पर संसद में आया. तब से पिछले 37 वर्षों के दौरान मैंने लोकसभा और राज्यसभा सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दीं. मैंने ऐसे समय में इस संसद में प्रवेश किया, जब राज्यसभा अनुभवी सांसदों और स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं से भरा हुआ था, जिनमें से कुछ बेहद प्रभावशाली वक्ता थे – एम. सी. चागला, अजित प्रसाद जैन, जयरामदास दौलतराम, भूपेश गुप्ता, जोएकिम अल्वा, महावीर त्यागी, राज नारायण, डॉ. भाई महावीर, लोकनाथ मिश्रा, चित्ता बासु और भी कई लोग.’

मुखर्जी ने सांसदों की पीढ़ियों को सिखाया है
लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सेवामुक्त हो रहे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरु हैं, जिनसे सांसदों की कई पीढ़ियों ने सबक सीखा है. संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के विदाई समारोह में सांसदों की सभा को संबोधित करते हुए महाजन ने कहा, ‘आप एक गुरु हैं, जिससे सांसदों की पीढ़ियों ने संसदीय राजनीति की संचालन गतिशीलता का सबक सीखा है.’

उन्होंने कहा, ‘आप संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के अपने दोष रहित ज्ञान और घटनाओं व पूर्वजों की अनुकरणीय स्मृति के लिए सम्माननीय हैं.’ महाजन ने कहा कि मुखर्जी की पश्चिम बंगाल के एक गांव से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा हमारे देश के समकालीन इतिहास से जुड़ी है और यह सभी के लिए प्रेरणादायक है.

अपने पांच दशकों के लंबे राजनीतिक जीवन में मुखर्जी चार बार राज्यसभा के सदस्य और दो बार लोकसभा के लिए चुने गए. महाजन ने मुखर्जी के लिए कहा, ‘एक राजनेता, सांसद, प्रशासक, लेखक और दूरदर्शी विचारक के रूप में आपकी उपलब्धि आपके बहुआयामी व्यक्तित्व का प्रमाण है.’