जानें क्या है शिव का वास्तविक अर्थ, क्यों कहते है उन्हें महाकाल

शिव का वास्तविक अर्थ शव है. लेकिन यहां इनका तात्पर्य कल्याणकारी देव से है, शिव बाबा भोलेनाथ, शिव यानि शिवशंकर, शिवशम्भू, शिवजी, नीलकंठ, रूद्र आदि अनेक नामों से प्रचलित भगवान रुद्र हिन्दू देवी-देवताओं में सबसे लोकप्रिय देवता हैं. वें देवों के देव महादेव कहा जाता है जो महाकाल भी उन्हें कहा जाता है, साथ ही वह असुरों के राजा भी उनके उपासक रहे. मेरी दृष्टि में उन्हें महाकाल कहने से सन्दर्भ यह है कि इस पृथ्वी पर जो कुछ भी हम अपनी आंखों से देख सकते हैं वह नाशवान हैं अर्थात पेड़, पौधे, मानव, पशु, पक्षी, प्रकृति सभी नश्वर हैं. पृथ्वी पर जिस किसी का भी अंत है वह महाकाल के अधीनस्थ ही हैं. आज भी दुनिया भर में हिन्दू धर्म के मानने वालों के लिये भगवान शिव पूज्य एवं आराध्य देव हैं. माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की पुकार बहुत जल्द सुन लेते हैं. इसलिये उनके भक्त अन्य देवी-देवताओं की तुलना में अधिक भी मिलते है.

भगवान भोलेनाथ का दिन सोमवार माना जाता है और उनकी पूजा का श्रेष्ठ माह श्रावण. वैसे तो हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि भी आती है लेकिन श्रावण माह में आने वाली शिवरात्रि को फाल्गुन महीने में आने वाली महाशिवरात्रि के समान ही फलदायी माना जाता है. कुछ श्रद्धालुगण श्रावण मास की शिव चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि मानते हैं जबकि वास्तव में यह शिवरात्रि कहलाती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रावण मास सभी देवी देवताओं का शयन माह कहलाता है, इसीलिए इस श्रावण माह कहा जाता है. इस माह में केवल रुद्र एकमात्र ऐसे देव हैं जो जागृत होकर अपने भक्तों पर कृपा की वर्षा करते रहते है.

श्रावण में शिवरात्रि का महत्वः
सभी शिवभक्तों को फाल्गुन माह के बाद श्रावण माह का खास तौर पर इंतजार रहता है. दरअसल सावन के पावन सोमवार और उसमें शिवरात्रि के त्यौहार की महिमा ही अलग होती है. इस शिवरात्रि का महत्व इसलिये भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें भगवान शिव का जलाभिषेक करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है. श्रावण के पूरे माह शिवभक्त बम भोले, हर-हर महादेव के नारे लगाते हुए नजर आते हैं. शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के लिये हरिद्वार, गौमुख से कांवड़ भी लेकर आते हैं. मान्यता है कि श्रावण महीने की शिवरात्रि के दिन जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करते हैं उनके कष्टों का निवारण होता है और मुरादें पूरी हो जाती है.