ये स्कूल है या गौशाला? यहां जान हथेली पर रखकर पढ़ रहे हैं बच्चे

सर, घर से स्कूल आने की तो गारंटी है. लेकिन स्कूल से घर सुरक्षित पहुंच जाए, इसकी कोई गारंटी नहीं है. विद्यालय भवन कभी भी ढह सकता है, बरसात में जो पानी बाहर बरस रहा है. वहीं पानी छत और दीवारों से कमरों और बरामदे में भी टपक रहा है. छत और दीवारों के पत्थर या कड़ी छिटककर सिर पर गिर जाए पता नहीं. ये शब्द हाईस्कूल क्यार्क-बरसूड़ी में कक्षा 8 में पढ़ने वाली छात्रा सुमन, सिमरन और कल्पना के हैं.

बसुकेदार तहसील का हाईस्कूल क्यार्क-बरसूड़ी का भवन हादसों को न्योता दे रहा है. यहां वर्तमान शिक्षण सत्र में 110 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं. लेकिन, स्कूल में न पर्याप्त कक्ष हैं और न संसाधन. साल 2014 में जूनियर से हाईस्कूल में उच्चीकृत हुए इस विद्यालय को आज तक अपना भवन नहीं मिल पाया है.

जबकि तत्कालीन विधायक शैलारानी रावत ने उद्घाटन के दिन नए स्कूल भवन की घोषणा की थी. लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी कक्षाएं जर्जर पुराने भवन पर चल रही है, जो कभी भी ढह सकता है. भवन के हालात यह है कि, बरसात का पानी जो बाहर बरस रहा है, वह छत और दीवारों से कक्षा कक्षों और बरामदे में भी है.

ऐसे में यहां बैठना तो दूर, खड़ा होना भी मुश्किल हैं. खिड़की, दरवाजे, तख्ते और कड़ियां जगह छोड़ चुकी हैं, जिससे दीवार से पत्थर या कड़ी कब छिटक जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. बावजूद जूनियर कक्षाएं जहां जर्जर भवन में चल रही हैं. वहीं हाईस्कूल के बच्चे मैदान के किनारे टिन के छप्पर में पढने को मजबूर हैं. जहां बरसाती घास में सांप व अन्य कीड़ों का डर है.

जिले में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक 60 से अधिक भवन जर्जर होकर हादसों को न्यौता दे रहे हैं. जूनियर हाईस्कूल बैरागणा, प्राथमिक विद्यालय सन-क्यार्क, तोलब, कर्णधार, जीआईसी बीरो-देवल, जूहा भुनका सहित 60 से अधिक स्कूल भवन जर्जर हाल में हैं, जो कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकते हैं. सबसे बुरी स्थिति ऊखीमठ और जखोली ब्लॉक के विद्यालयों की बनी हुई है.

मुख्य शिक्षाधिकारी रुद्रप्रयाग चित्रागन काला ने बताया कि हाईस्कूल क्यार्क-बरसूड़ी में दो कक्षा कक्ष व शौचालय का निर्माण जिला योजना में किया जाएगा. बजट पारित हो चुका है. अन्य जर्जर व जीर्ण-शीर्ण विद्यालय भवनों के बारे बीईओ कार्यालय से सूची मांगी जा रही है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.